रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नशे के खिलाफ चल रही जंग में पुलिस को एक ऐसी कामयाबी मिली है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं. शहर की सड़कों पर रफ़्तार भरने वाले रैपिडो बाइक राइडर और कूरियर सर्विस अब सिर्फ सामान ही नहीं, बल्कि ‘मौत’ यानी एमडीएमए (MDMA) ड्रग्स की डिलीवरी कर रहे थे. रायपुर कमिश्नरेट पुलिस ने एक ऐसे हाई-टेक ड्रग्स सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जो दिल्ली के आलीशान कमरों से बैठकर छत्तीसगढ़ के युवाओं की रगों में जहर घोल रहा था. इस पूरी कार्रवाई में पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 6 लोगों को सलाखों के पीछे भेज दिया है.
हाई-टेक तस्करी: ‘डेड ड्रॉप’ और कूरियर का मायाजाल
इस ड्रग्स नेटवर्क की सबसे चौंकाने वाली बात इसका काम करने का तरीका था. आरोपी पुलिस की नजरों से बचने के लिए ‘डेड ड्रॉप सिस्टम’ का इस्तेमाल कर रहे थे. इसमें ड्रग्स बेचने वाला और खरीदने वाला कभी एक-दूसरे के सामने नहीं आते थे. ड्रग्स को किसी सुनसान इलाके, पेड़ के नीचे या बिजली के खंभे के पास छिपा दिया जाता था और फिर उसका वीडियो या जीपीएस लोकेशन ग्राहक को भेज दी जाती थी.
दिल्ली से यह नशा कूरियर के जरिए रायपुर पहुंचता था. यहाँ कुणाल मंगतानी नाम का शख्स इस खेप को रिसीव करता था और फिर असली खेल शुरू होता था. कुणाल ने शहर के कुछ रैपिडो बाइक राइडरों को अपने जाल में फँसा रखा था. ये राइडर सवारी ढोने के बहाने शहर के कोने-कोने में ड्रग्स की पुड़िया पहुँचाते थे. आम लोगों को लगता था कि कोई पार्सल जा रहा है, लेकिन हकीकत में वह सिंथेटिक नशा होता था.
कैसे टूटी इस सिंडिकेट की कड़ी?
रायपुर की एंटी क्राइम और साइबर यूनिट को काफी समय से इस संदिग्ध हलचल की खबर मिल रही थी. 29 मार्च 2026 को पुलिस ने जाल बिछाया और तेलीबांधा इलाके के काशीराम नगर में तीन रैपिडो राइडरों—सौरभ डोंगरे, शुभम राठौर और सौरभ यादव को रंगे हाथों दबोच लिया. जब इनकी तलाशी ली गई, तो इनके पास से भारी मात्रा में एमडीएमए ड्रग्स बरामद हुई.
इन तीनों से जब कड़ी पूछताछ हुई, तो उन्होंने कुणाल मंगतानी का नाम उगला. कुणाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के हाथ इस सिंडिकेट के असली आकाओं तक पहुँचे. जांच में पता चला कि दिल्ली के पंचशील विहार में बैठकर महेश खड़का और कुसुम हिन्दुजा इस पूरे काले कारोबार को रिमोट कंट्रोल की तरह चला रहे थे. पुलिस की एक विशेष टीम दिल्ली रवाना हुई और दोनों को पकड़कर रायपुर ले आई. हैरानी की बात यह है कि ये दोनों पहले भी ड्रग्स केस में जेल जा चुके थे, लेकिन बाहर आते ही इन्होंने और बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया.
नाइजीरियन कनेक्शन और बरामदगी
पकड़े गए आरोपियों ने कबूल किया है कि वे दिल्ली में रहने वाले कुछ नाइजीरियन नागरिकों से यह नशा खरीदते थे. पुलिस अब उस विदेशी लिंक को तलाश रही है जो भारत के बड़े शहरों में एमडीएमए और पार्टी पिल्स की सप्लाई कर रहा है.
पुलिस ने इस छापेमारी में करीब 48 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स, जिसकी कीमत 7 लाख रुपये है, बरामद की है. इसके अलावा पार्टी पिल्स, 9 मोबाइल फोन और तस्करी में इस्तेमाल होने वाली मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है. कुल मिलाकर 10 लाख रुपये का सामान पुलिस के कब्जे में है. रायपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने ड्रग्स माफियाओं के कमर तोड़ दी है, लेकिन रैपिडो जैसी सेवाओं का दुरुपयोग सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है.