रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता का निधन, पिछले कुछ समय से थे बीमार, जोधपुर एम्स में चल रहा था इलाज

उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर जोधपुर के सिवांची गेट स्थित श्मशान घाट पर किया जाएगा।

Vin News Network
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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता का निधन, पिछले कुछ समय से थे बीमार, जोधपुर एम्स में चल रहा था इलाज

जोधपुर : केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता दाउ लाल वैष्णव (81 वर्ष) का दिनांक 08 जुलाई 2025 को पूर्वाह्न 11:52 बजे एम्स जोधपुर में निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे और AIIMS जोधपुर में उपचाराधीन थे। चिकित्सा टीम के हरसंभव प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। यह जानकारी AIIMS Jodhpur ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी।

इससे पहले एम्स जोधपुर ने एक्स पर लिखा था, यह देखा गया है कि रेल मंत्री के पिता दाउ लाल के निधन से संबंधित भ्रामक खबरें सोशल मीडिया और स्थानीय चैनलों पर फैलाई जा रही हैं। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि दाउ लाल वैष्णव AIIMS जोधपुर में उपचाराधीन हैं। उनकी स्थिति गंभीर है और वरिष्ठ डॉक्टरों की निगरानी में हैं। कृपया किसी प्रकार की ग़लत जानकारी फैलाने से बचें। आवश्यक होने पर AIIMS जोधपुर द्वारा ही आधिकारिक जानकारी दी जाएगी।

वे मूल रूप से पाली जिले के जीवंद कला निवासी थे और बाद में परिवार के साथ जोधपुर में बस गए थे। रातानाडा भास्कर चौराहा के पास महावीर कॉलोनी में उनका घर है। अपने गांव में वे सरपंच भी रह चुके हैं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। दाऊलाल वैष्णव ने जोधपुर में एक वकील और कर सलाहकार के रूप में लंबे समय तक कार्य किया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी आज सुबह ही जोधपुर पहुंचे थे। वे एयरपोर्ट से सीधे एम्स पहुंचे थे। काफी देर तक वे पिता का हाथ थामे बैठे रहे। उनके पिता के लंग्स डैमेज हो चुके थे।

उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर जोधपुर के सिवांची गेट स्थित श्मशान घाट पर किया जाएगा। उनकी अंतिम यात्रा में परिवार, रिश्तेदार, समाज के गणमान्य लोग और कई राजनीतिक व प्रशासनिक हस्तियां शामिल होंगी। उनके परिवार में पत्नी सरस्वती वैष्णव, बड़े बेटे अश्विनी वैष्णव और छोटे बेटे आनंद वैष्णव हैं।

रेल मंत्री बनने के बाद 2 अक्टूबर 2021 को पहली बार अश्विनी वैष्णव जोधपुर पहुंचे थे। इस दौरान पिता-पुत्र की मुलाकात काफी कम समय के लिए हो पाई थी, तब दाऊलाल वैष्णव ने अश्विनी वैष्णव को एक चिट्‌ठी लिखी। उन्होंने लिखा- ‘कर्तव्य को इतनी निष्ठा से निष्पादित करो कि हर रेलयात्री का चेहरा यात्रा के दौरान फूल सा खिला रहे।’

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