कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने हालिया बयान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चेतावनी देते हुए कहा कि वह “एटम बम से भी बड़ा हाइड्रोजन बम” फोड़ने वाले हैं। उन्होंने मंच से कहा – “बीजेपी सुन लो, एटम बम से बड़ा है हाइड्रोजन बम। अब तैयार हो जाओ, हाइड्रोजन बम आ रहा है।” राहुल गांधी के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। बीजेपी ने पलटवार करते हुए इसे हास्यास्पद करार दिया और कांग्रेस नेता पर गंभीरता की कमी का आरोप लगाया।
बीजेपी का पलटवार
राहुल गांधी के बयान पर पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा – “एटम बम और हाइड्रोजन बम का चुनाव से क्या संबंध है? राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं, उन्हें अपने शब्दों में गंभीरता लानी चाहिए। आप खुद को इतना हल्का क्यों बना रहे हैं? जनता गंभीर मुद्दों पर चर्चा चाहती है, बमों पर नहीं।” बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस नेता चुनावी मंच को वैज्ञानिक प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि असल मुद्दों जैसे विकास, बेरोजगारी और महंगाई पर चर्चा होनी चाहिए।
एटम बम बनाम हाइड्रोजन बम – वैज्ञानिक पहलू
राजनीतिक बयानबाजी से इतर आम जनता के मन में यह सवाल जरूर उठा कि आखिर एटम बम और हाइड्रोजन बम में फर्क क्या होता है।
एटम बम – एटम बम यानी परमाणु बम विखंडन (Fission) की प्रक्रिया पर आधारित होता है। इसमें यूरेनियम या प्लूटोनियम जैसे भारी तत्वों को छोटे टुकड़ों में तोड़कर ऊर्जा निकाली जाती है। यह विस्फोट अत्यंत शक्तिशाली होता है और बड़े पैमाने पर विनाश कर सकता है। 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर एटम बम गिराया था। इन बमों से लगभग 2 लाख से ज्यादा लोग मारे गए और जापान को आत्मसमर्पण करना पड़ा।
हाइड्रोजन बम – हाइड्रोजन बम को थर्मोन्यूक्लियर बम भी कहा जाता है। यह संलयन (Fusion) की प्रक्रिया पर काम करता है। इसमें हाइड्रोजन के आइसोटोप – ड्यूटेरियम और ट्रिटियम का इस्तेमाल किया जाता है। हाइड्रोजन परमाणु मिलकर भारी ऊर्जा पैदा करते हैं और विस्फोट का दायरा हजारों गुना बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोजन बम एटम बम से 1000 गुना ज्यादा शक्तिशाली हो सकता है। अमेरिका ने 1954 में पहली बार इसका परीक्षण किया था।
हाइड्रोजन बम क्यों ज्यादा खतरनाक?
हाइड्रोजन बम का विनाशकारी असर इतना भयंकर होता है कि यह पूरे शहर को मिटा सकता है। जहां एटम बम का असर कुछ किलोमीटर तक सीमित होता है, वहीं हाइड्रोजन बम का प्रभाव सैकड़ों किलोमीटर तक फैल सकता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि एटम बम के मुकाबले हाइड्रोजन बम में विकिरण, धमाका और गर्मी कई गुना ज्यादा होती है, जिससे मौत और तबाही की दर भी असाधारण रूप से बढ़ जाती है।
सियासी बहस का नया एंगल
राहुल गांधी का हाइड्रोजन बम वाला बयान सिर्फ वैज्ञानिक चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे चुनावी राजनीति से भी जोड़ा गया। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि राहुल गांधी का आशय प्रतीकात्मक था। वे बताना चाहते थे कि उनके पास ऐसे बड़े राजनीतिक मुद्दे हैं, जिन्हें उठाकर बीजेपी को मुश्किल में डाल सकते हैं। वहीं, बीजेपी का दावा है कि राहुल गांधी मुद्दों की गंभीरता को मजाक में बदल रहे हैं।
जनता की नजर में
साधारण जनता इस पूरे विवाद को अलग नजरिए से देख रही है। कुछ लोग इसे राहुल गांधी का “चौंकाने वाला चुनावी अंदाज” मान रहे हैं, तो कुछ इसे “गैर-गंभीर बयान” बता रहे हैं। लेकिन एक बात साफ है – इस बयान ने सोशल मीडिया पर खूब जगह बनाई और “एटम बम बनाम हाइड्रोजन बम” ट्रेंड करने लगा।
राहुल गांधी का “हाइड्रोजन बम” बयान भारतीय राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो हाइड्रोजन बम, एटम बम से कई गुना ज्यादा विनाशकारी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसे वैज्ञानिक शब्द चुनावी राजनीति में जगह रखते हैं? बीजेपी और कांग्रेस दोनों इस मुद्दे को भुनाने में लगी हैं, लेकिन जनता का ध्यान असली मुद्दों की ओर मोड़ना अब भी दोनों की सबसे बड़ी चुनौती है।