दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय बैडमिंटन स्टार P. V. Sindhu ने युवा खिलाड़ियों को महत्वपूर्ण सलाह दी है कि खेल के साथ-साथ शिक्षा पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी है। गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल खेल पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि खेल का करियर सीमित और अनिश्चित होता है।
सिंधू ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “आप पूरी जिंदगी खेल नहीं सकते। एक समय आता है जब रिटायर होना पड़ता है, लेकिन पढ़ाई हमेशा आपके साथ रहती है।” उन्होंने बताया कि खेल में चोटें कभी भी करियर को प्रभावित कर सकती हैं, जैसा कि 2015 में उनके पैर में स्ट्रेस फ्रैक्चर के दौरान हुआ था। उस समय उन्हें छह महीने तक खेल से दूर रहना पड़ा और 2016 रियो ओलंपिक से पहले काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने शानदार वापसी कर रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता।
पीवी सिंधू ने यह भी कहा कि पढ़ाई और खेल दोनों में मेहनत जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने खुद एमबीए किया और प्रशिक्षण के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था। उन्होंने अपने कोच Pullela Gopichand के दृष्टिकोण से सहमति जताते हुए कहा कि खेल और शिक्षा का संतुलन ही सफलता की कुंजी है।
सिंधू का संदेश स्पष्ट है युवा खिलाड़ी अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए पढ़ाई को कभी नजरअंदाज न करें और खेल के साथ शिक्षा को भी प्राथमिकता दें।