पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनाव 2026 के पहले चरण में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दो प्रमुख गुटों – शरद पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी-एससीपी और अजीत पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी – ने शनिवार को संयुक्त रूप से मीडिया के सामने अपना साझा घोषणा पत्र पेश किया। इस अवसर पर पार्टी की दो शाखाओं के नेताओं सुप्रिया सुळे और अजीत पवार ने एक ही मंच पर एकजुटता का दुर्लभ प्रदर्शन किया, जो लंबे समय से राजनीतिक माहौल में चर्चा का विषय बना हुआ था।
सुप्रिया सुळे और अजीत पवार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दोनों गुटों का यह साझा मंच न केवल पार्टी के संगठनात्मक मजबूती का प्रतीक है, बल्कि यह उनके चुने हुए स्थानीय कार्यक्रमों और विकास योजनाओं को जनता तक पहुँचाने का भी माध्यम है। उन्होंने घोषणा पत्र में शहरों में नागरिक सुविधाओं, सड़क और यातायात सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं और स्मार्ट सिटी पहल को प्राथमिकता देने का भरोसा दिलाया।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनाव गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को होंगे। मतदान सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक चलेगा। यह महाराष्ट्र में 2026 का पहला बड़ा चुनाव माना जा रहा है और इसके परिणाम राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। राज्य भर में कुल 29 स्थानीय निकाय चुनाव के लिए तैयार हैं। इन चुनावों में देरी का मुख्य कारण वर्षों से लंबित कानूनी विवाद थे।
महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, इन नगर निकायों के कार्यकाल 2015 से 2018 के बीच समाप्त हो चुके हैं। ब्रह्मानमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) सहित 17 अन्य प्रमुख नगर निगमों के पिछले चुनाव 2017 में हुए थे। वहीं, वसई-विरार, कोल्हापुर, औरंगाबाद, नवी मुंबई और कल्याण-डोंबिवली के निगम चुनाव 2015 में आयोजित हुए थे, जबकि धुले, जालगांव, अहमदनगर और सांगली-मिरज-कुपवाड़ नगर निगमों में चुनाव 2018 में हुए थे।
राजनीतिक माहौल इस बार बेहद प्रतिस्पर्धी होने की संभावना है। सत्ता पक्ष की महायुति गठबंधन की ओर से भाजपा ने 137 और शिवसेना ने 90 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। अजीत पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी ने इस बार स्वतंत्र रूप से 94 उम्मीदवार खड़े किए हैं। यदि चुनाव से पहले किसी भी सीट पर प्रत्याशियों की वापसी नहीं होती है, तो अजीत पवार का गुट कई सीटों पर महायुति के अपने सहयोगियों के सीधे मुकाबले में रहेगा।
विपक्ष की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण है। कांग्रेस ने इस बार 143 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। इसके सहयोगी, वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर ने 42 उम्मीदवार खड़े किए हैं, जबकि उन्हें पूर्व-सहमति के तहत 62 सीटें मिली थीं। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस का एक और सहयोगी, राष्ट्रीय समाज पक्ष ने 6 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
शिवसेना (यूबीटी), जो पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में है, ने 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। वहीं, शरद पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी (एससीपी गुट) ने केवल 11 सीटों पर अपनी चुनौती पेश की है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (राज ठाकरे) शेष सीटों के लिए चुनाव लड़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार चुनाव परिणाम पूरे पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। दोनों प्रमुख गुटों के साझा मंच ने स्थानीय मतदाताओं में उत्सुकता और राजनीतिक चर्चा को बढ़ा दिया है। चुनावी रणनीति में उम्मीदवारों की संख्या, गठबंधन की स्थिति और घोषणापत्र की लोकप्रियता निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
सुप्रिया सुळे और अजीत पवार की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस ने स्पष्ट संदेश दिया कि एनसीपी के भीतर मतभेद भले ही रहे हों, लेकिन स्थानीय स्तर पर जनता की सेवा और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल राजनीतिक सत्ता के लिए नहीं है, बल्कि नागरिकों के लिए बेहतर सुविधा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर है।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनाव 2026 राज्य भर में होने वाले अन्य नगर निकाय चुनावों की दिशा को भी प्रभावित कर सकते हैं। इन चुनावों के दौरान सभी राजनीतिक दलों द्वारा चलाए जाने वाले अभियान, रोडशो, जनसभाएं और सोशल मीडिया प्रचार अत्यधिक सक्रिय रहेंगे। मतदान में बढ़ी हुई भागीदारी और युवा मतदाताओं की सक्रियता इस बार के चुनाव की सफलता या विफलता में महत्वपूर्ण कारक मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार एनसीपी के दो गुटों की साझा रणनीति और घोषणापत्र ने चुनावी लड़ाई को और भी दिलचस्प बना दिया है। यदि दोनों गुटों का सहयोग कायम रहता है और प्रत्याशी जनता तक प्रभावी संदेश पहुंचाते हैं, तो यह गठबंधन कई महत्वपूर्ण सीटों पर जीत हासिल कर सकता है।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनाव 2026 न केवल राजनीतिक दलों के लिए, बल्कि स्थानीय जनता के लिए भी महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। सभी दलों की नीतियों, उम्मीदवारों की छवि और घोषणापत्र की लोकप्रियता चुनाव के अंतिम परिणाम को निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।