ईरान – हाल ही में जारी एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान में लगातार हफ्तों तक चल रहे विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 16,500 लोग मारे गए और लगभग 3,30,000 लोग घायल हुए हैं। ये प्रदर्शनों की शुरुआत आर्थिक मुद्दों से हुई थी, लेकिन जल्द ही यह ईरानी शासन के खिलाफ व्यापक गुस्से और प्रदर्शन में बदल गए।
शनिवार को पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता आयातोल्लाह अली खामेनी ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों में “कई हजार” लोग मारे गए। हालांकि रिपोर्ट में यह संख्या कहीं अधिक बताई गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिकांश पीड़ित 30 वर्ष से कम आयु के हैं। म्यूनिख MED के मेडिकल डायरेक्टर और ईरानी-जर्मन नेत्र विशेषज्ञ प्रोफेसर अमीर परास्ता ने कहा कि इस बार ईरानी प्रशासन ने विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सैन्य-स्तरीय हथियारों का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों के सिर, गले और छाती पर गोली और शार्ट ग्रेनेड से हुए गंभीर घाव देखे गए हैं।
इस रिपोर्ट के अनुसार ईरान के आठ प्रमुख नेत्र अस्पतालों और 16 आपातकालीन विभागों से डेटा एकत्र किया गया, जिससे पता चला कि कम से कम 16,500 से 18,000 लोग मारे गए और 3,30,000 से 3,60,000 घायल हुए। इन आंकड़ों में बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कम से कम 700 से 1,000 लोगों ने अपनी आंख खो दी। केवल तेहरान के नूर क्लिनिक ने ही 7,000 नेत्र घाव के मामले दर्ज किए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई लोग रक्त की कमी के कारण भी मरे। कई अस्पतालों के मेडिकल कर्मचारियों ने मरीजों को बचाने के लिए अपना खुद का रक्त दान किया। हालांकि, कुछ मामलों में सुरक्षा बलों ने रक्तदान की अनुमति नहीं दी।
अमेरिका स्थित Human Rights Activists News Agency (HRANA) ने अब तक कम से कम 3,090 मौतों की पुष्टि की है, जिसमें 2,885 प्रदर्शनकारी शामिल हैं, और 22,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रोफेसर परास्ता ने ईरान की कार्रवाई को “डिजिटल अंधकार के पीछे नरसंहार” करार दिया। उन्होंने कहा, “उन्होंने कहा था कि तब तक मारेंगे जब तक यह आंदोलन खत्म नहीं होता, और वही कर रहे हैं।”
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ईरानी डॉक्टरों ने यह जानकारी एलोन मस्क के स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट के माध्यम से दी। ईरान में सरकार द्वारा लगाए गए इंटरनेट बंद के बीच स्टारलिंक ने नागरिकों को जानकारी साझा करने और संपर्क में रहने का माध्यम प्रदान किया। हाल ही में स्पेसएक्स ने ईरानी नागरिकों के लिए यह सेवा मुफ्त कर दी।
इस इंटरनेट ब्लैकआउट ने कई हफ्तों तक देश में सूचना के प्रवाह को रोक दिया और ईरानवासियों को दुनिया से कट कर रखा। इस बीच, स्टारलिंक ने सरकार की सैटेलाइट जामिंग और सिग्नल स्पूफिंग को चुनौती दी, जिससे यह तकनीकी विवाद एक नए भू-राजनीतिक संकट में बदल गया।
ईरान में यह विरोध प्रदर्शन और उसके दौरान हुई हिंसा न केवल देश की अंदरूनी स्थिति को उजागर करती है, बल्कि वैश्विक मानवाधिकार और डिजिटल स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है।