प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक प्रेरक संस्कृत सुभाषितम साझा किया और इसके माध्यम से उद्यमियों, कर्मठ नागरिकों और युवाओं को संदेश दिया कि कठिन परिश्रम और दृढ़ निश्चय से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस सुभाषितम को साझा करते हुए लिखा:
“नात्युच्चशिखरो मेरुर्नातिनीचं रसातलम्।
व्यवसायद्वितीयानां नात्यपारो महोदधिः॥”
इस सुभाषितम का भावार्थ है कि कोई भी पर्वत इतना ऊंचा नहीं है और कोई भी स्थान इतना गहरा नहीं है कि उसे पार न किया जा सके। इसी तरह, कोई भी महासागर इतना विशाल नहीं है कि उसे पार करना असंभव हो। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का दृष्टिकोण विशेष रूप से उद्यमियों और मेहनती लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब मनुष्य दृढ़ निश्चय और सही दिशा में प्रयास करता है, तो कोई भी लक्ष्य अत्यंत कठिन या असंभव नहीं होता। चाहे वह व्यवसाय में सफलता हो, किसी सामाजिक कार्य की पहल हो, या वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र में नवीनतम उपलब्धि – यह संदेश सभी क्षेत्रों में समान रूप से लागू होता है।
सुभाषितम में प्रयुक्त “मेरु” और “महासागर” जैसी प्रतीकात्मक भाषा यह दर्शाती है कि जीवन में आने वाली चुनौतियाँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, सही रणनीति, मेहनत और लगन से उन्हें पार किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने इस सन्देश के माध्यम से युवाओं और नवोदयशील उद्यमियों को प्रेरित किया कि वे अपने सपनों को साकार करने में किसी भी बाधा से न डरें।
विशेष रूप से व्यवसायियों के लिए यह सुभाषितम महत्वपूर्ण है, क्योंकि उद्यमिता केवल नयी सोच और निवेश से ही नहीं, बल्कि धैर्य, कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयास से भी जुड़ी है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह संदेश देकर यह सुनिश्चित किया कि भारत के युवा और व्यवसायिक समुदाय आत्मविश्वास के साथ किसी भी चुनौती का सामना करें।
इस संदेश को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे साहस, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ किसी भी असंभव को संभव बनाने का प्रयास करें। उनके अनुसार, जीवन में सफलता का माप केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि संघर्ष के दौरान दिखाए गए धैर्य और जुझारूपन से भी होता है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश न केवल प्रेरक है, बल्कि राष्ट्र के उद्यमियों और युवाओं के लिए मार्गदर्शन और उत्साह का स्रोत भी है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कुछ भी असंभव नहीं है, और कठिनाइयाँ केवल उन्हें पार करने वाले लोगों के लिए एक अवसर प्रस्तुत करती हैं।