देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर आज राष्ट्रव्यापी भारत बंद आयोजित किया गया है। संयुक्त मंच का दावा है कि इस हड़ताल में करीब 30 करोड़ मजदूर शामिल हो सकते हैं, जिससे बैंकिंग सेवाएं, राज्य परिवहन, औद्योगिक इकाइयां और कुछ सरकारी दफ्तरों का कामकाज प्रभावित होने की संभावना है। हालांकि अस्पताल, एम्बुलेंस, मेडिकल स्टोर, एयरपोर्ट और अन्य आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की बात कही गई है।
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर के अनुसार, इस बार भागीदारी पिछले आंदोलनों से अधिक हो सकती है। यूनियनों का कहना है कि 600 से अधिक जिलों में बंद का असर देखने को मिल सकता है। इससे पहले 9 जुलाई 2025 को हुए विरोध प्रदर्शन में लगभग 25 करोड़ मजदूर शामिल हुए थे। इस बार किसान संगठनों, कृषि मजदूर यूनियनों, छात्र और युवा संगठनों ने भी बंद को समर्थन दिया है।
यह हड़ताल केंद्र सरकार की कथित श्रमिक-विरोधी और किसान-विरोधी नीतियों के विरोध में बुलाई गई है। प्रमुख मांगों में नए श्रम कानूनों की समीक्षा, न्यूनतम वेतन की गारंटी, बेहतर कार्य परिस्थितियां, सप्ताह में पांच दिन कार्य प्रणाली लागू करना और मनरेगा को प्रभावी ढंग से लागू करना शामिल है। यूनियनों का दावा है कि सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और औद्योगिक क्लस्टरों में हड़ताल का असर पड़ेगा, जबकि बाजार और थोक मंडियां भी कई स्थानों पर बंद रह सकती हैं।
प्रशासन ने विभिन्न राज्यों में एहतियाती इंतजाम किए हैं और शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। बंद का वास्तविक असर स्थानीय भागीदारी और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, इसलिए लोगों को घर से निकलने से पहले अपने शहर की ताजा स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।