राजस्थान में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की तैयारी! निकाय और पंचायत चुनाव साथ कराने के संकेत, मंत्री के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

Vin News Network
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राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव साथ कराने की तैयारी

विन न्यूज़ नेटवर्क। राजस्थान की राजनीति में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। राज्य के स्वायत्त शासन एवं नगरीय विकास (यूडीएच) मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने संकेत दिया है कि सरकार प्रदेश में नगर निकाय और पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव एक साथ कराने की दिशा में काम कर रही है।

यदि ऐसा होता है तो यह राज्य में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की तर्ज पर स्थानीय चुनाव कराने की बड़ी पहल होगी। मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक दलों, संभावित उम्मीदवारों और चुनावी विश्लेषकों के बीच नई अटकलें तेज हो गई हैं।

सरकार चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी

झुंझुनूं दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि स्वायत्त शासन विभाग अपनी प्रशासनिक तैयारियां पहले ही पूरी कर चुका है। उनके अनुसार, विभाग मार्च 2026 तक चुनाव संबंधी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर चुका है।

उन्होंने बताया कि अब आगे की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के स्तर पर है। यदि इन संस्थाओं को किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता होगी, तो राज्य सरकार हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराएगी।

‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ से क्या होगा फायदा?

यदि नगर निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराए जाते हैं तो इससे चुनावी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी खर्च में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर अंतिम फैसला राज्य निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

दो-संतान नियम हटाने का भी ऐलान

यूडीएच मंत्री ने नगर निकाय चुनाव से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण फैसला साझा किया। उन्होंने बताया कि पार्षद पद के चुनाव के लिए लागू दो-संतान संबंधी पात्रता नियम को समाप्त कर दिया गया है।

इस बदलाव के बाद अब ऐसे कई संभावित उम्मीदवार भी चुनाव लड़ सकेंगे, जो पहले इस प्रावधान के कारण अयोग्य हो जाते थे। माना जा रहा है कि इससे आगामी निकाय चुनावों में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ सकती है।

राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा

मंत्री के बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक दल अब संभावित चुनावी रणनीति पर विचार करने लगे हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक चुनाव की तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों चुनाव एक साथ कराए जाते हैं तो यह प्रदेश की चुनावी व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

आयोगों की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार

फिलहाल सभी की निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक तस्वीर सामने आएगी।

राजस्थान सरकार के संकेतों ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।

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