मुंबई के मलाड पश्चिम इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दो फल विक्रेताओं को कथित रूप से फलों पर चूहे मारने की दवा लगाकर बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
यह मामला तब उजागर हुआ जब एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में एक व्यक्ति फलों, खासकर केले पर क्रीम जैसे दिखने वाले किसी पदार्थ को लगाते हुए नजर आ रहा था। इस संदिग्ध गतिविधि ने लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी, जिसके बाद स्थानीय निवासी कुणाल सालुंके ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। शिकायत मिलने के बाद Mumbai Police हरकत में आई और मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने मलाड पश्चिम के राजनपाड़ा इलाके में स्थित एक सड़क किनारे की फल दुकान पर छापा मारा। वहां से “रैटोल” नामक एक जहरीला पदार्थ बरामद किया गया, जो आमतौर पर चूहों को मारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह पदार्थ पीले फास्फोरस जैसे खतरनाक रसायनों से युक्त होता है और मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। इस खुलासे के बाद पुलिस ने तुरंत दुकान को सील कर दिया।
पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों मनोज संगमलाल केसरवानी (42) और राहुल सदानलाल केसरवानी (25) को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी उसी इलाके के निवासी बताए जा रहे हैं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें बोरीवली स्थित अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कबूल किया कि वे फलों को चूहों से बचाने के लिए उन पर जहरीला पदार्थ छिड़कते थे। हालांकि, पुलिस का कहना है कि इस तरह की हरकत पूरी तरह गैरकानूनी है और इससे आम जनता के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे रसायन अगर खाने के जरिए शरीर में चले जाएं तो वे जानलेवा भी साबित हो सकते हैं।
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में डर और गुस्से का माहौल है। लोग अब सड़क किनारे बिकने वाले फलों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कई लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है और आगे की जांच जारी है। साथ ही, इस घटना के बाद आसपास के अन्य फल विक्रेताओं की भी जांच शुरू कर दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और इस तरह की खतरनाक गतिविधि तो नहीं हो रही।
यह मामला खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को नियमित रूप से बाजारों और सड़क किनारे लगने वाली दुकानों की जांच करनी चाहिए। वहीं, उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने और खरीदारी करते समय सावधानी बरतने की जरूरत है।
मलाड की यह घटना एक चेतावनी है कि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। ऐसे में प्रशासन और आम नागरिक दोनों की जिम्मेदारी है कि खाद्य सुरक्षा के नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।