पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर में दी बड़ी चेतावनी, कहा – “दास मानसिकता और इतिहास मिटाने के प्रयास”

Vin News Network
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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में पीएम मोदी ने इतिहास और संस्कृति की महत्ता पर जोर दिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के श्री सोमनाथ मंदिर का दौरा किया और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में हिस्सा लिया। यह पर्व मंदिर पर हुए विदेशी हमलों की 1,000वीं वर्षगांठ के अवसर पर मनाया गया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी कुछ शासनकालों ने सोमनाथ मंदिर का इतिहास मिटाने के “दुर्भाग्यपूर्ण प्रयास” किए। उन्होंने इसे दास मानसिकता और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद निंदनीय बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की साहस, अडिग विश्वास और पुनर्निर्माण की प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अतीत में कुछ लोग मंदिर को केवल लूट के लिए नष्ट होने वाला स्थल बताकर वास्तविक इतिहास को पीढ़ियों से छिपाने का प्रयास करते रहे।

मोदी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक सोच में “दास मानसिकता” रही, जिसने लोगों को सोमनाथ मंदिर और इसकी विरासत के महत्व से अनभिज्ञ रखा। उनका कहना था कि इस तरह की मानसिकता ने भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक शक्ति के प्रति जागरूकता को कमजोर किया।

सरदार पटेल और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयास

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, लेकिन इसे रोकने की कोशिशें भी हुईं। उन्होंने बताया कि जब भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर दर्शन के लिए आने का निर्णय लिया, तब भी विरोध किया गया।

पीएम मोदी ने कहा, “जो लोग मनमाफिक राजनीति करते हैं और कट्टर मानसिकता के सामने झुकते हैं, उन्होंने भी इस मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया। जब भारत स्वतंत्र हुआ और सरदार पटेल ने सोमनाथ पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब कई प्रयास इसे रोकने के लिए किए गए। 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के दर्शन पर भी आपत्ति जताई गई।”

मोदी ने यह भी कहा कि वह अक्सर सोचते हैं कि सदियों पहले सोमनाथ में वातावरण कैसा रहा होगा। उन्होंने कहा कि आज यहां उपस्थित लोगों के पूर्वजों ने अपने विश्वास और विरासत की रक्षा के लिए अपने जीवन को खतरे में डालकर बलिदान किया।

सोमनाथ का इतिहास – साहस, बलिदान और पुनर्निर्माण

प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि सोमनाथ का इतिहास केवल विनाश का इतिहास नहीं, बल्कि साहस, त्याग और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मंदिर ने बार-बार आक्रमणों और क्षति के बावजूद पुनर्निर्माण की यात्रा देखी।

उन्होंने कहा, “सोमनाथ मंदिर की कहानी हर भारतीय को याद दिलाती है कि संघर्ष और आस्था से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। यह मंदिर हमारे साहस और बलिदान का जीवंत प्रमाण है।”

पीएम मोदी ने मंदिर की 1,000 साल की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी मंदिर के ऊपर झंडा लहराता है, जो दुनिया को भारत की शक्ति और अडिग आत्मा की याद दिलाता है। उन्होंने इसे अविचल राष्ट्रीय और आध्यात्मिक प्रतीक बताया।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का महत्व

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह देशवासियों की आस्था, विश्वास और साहस का उत्सव है। उन्होंने बताया कि इस पर्व में हिस्सा लेना उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव है।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने कभी दुनिया को यह सिखाया नहीं कि दूसरों को पराजित करके विजय प्राप्त की जाती है। देश के मूल्य सदैव धार्मिक आस्था, नैतिक साहस और सामूहिक शक्ति पर आधारित रहे हैं।

जैन संत भुवन भानु सुरिश्वरजी महाराज की 500वीं पुस्तक विमोचन

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने जैन संत श्रीमद विजयरत्न सुंदर सुरिश्वरजी महाराज की 500वीं पुस्तक के विमोचन पर वीडियो संदेश भी जारी किया। पीएम मोदी ने कहा कि महाराज साहब ने ज्ञान को केवल पढ़ने तक सीमित न रखकर जीवन में अपनाने का मार्ग दिखाया।

उन्होंने कहा कि संत ने दूसरों को भी यह प्रेरणा दी कि ज्ञान का असली मूल्य तब मिलता है जब इसे दैनिक जीवन में लागू किया जाए। प्रधानमंत्री ने महाराज की शांत, सरल और स्पष्ट दृष्टि की सराहना की और इसे समाज में स्थायी प्रभाव डालने वाला बताया।

प्रधानमंत्री मोदी का सोमनाथ यात्रा पर भाषण न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि यह भारत की अडिग आत्मा और साहस का भी प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर की पुनर्निर्माण यात्रा और 1,000 सालों के संघर्ष ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की सांस्कृतिक विरासत कभी कमजोर नहीं पड़ सकती।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वे अपने इतिहास, संस्कृति और धर्म का सम्मान करें और आने वाली पीढ़ियों तक इसे सुरक्षित रखें। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ने देशवासियों को यह याद दिलाया कि भारत की आस्था, शक्ति और संस्कृति न कभी टूट सकती है और न ही मिटाई जा सकती है।

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