नई दिल्ली : कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपना मौन व्रत नहीं तोड़ते और हमें ऑपरेशन सिंदूर, व्यापार समझौते पर वॉशिंगटन से आने वाले फैसलों को पढ़ना पड़ता है, हमें इसे राष्ट्रपति ट्रंप के मुंह से सुनना पड़ता है। यह एक अजीब स्थिति है, यह हमारे लोकतंत्र, संसद, राजनीतिक दलों का अपमान है। प्रधानमंत्री सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाते? इस व्यापार समझौते का रहस्य क्या है, आपने क्या निर्णय लिया है, क्या हम अपनी आयात नीति में इतना बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं कि हम अमेरिका से ज्यादा चीजें खरीदेंगे, क्या हम अपने कृषि क्षेत्र को खोलने जा रहे हैं, क्या हम अपने लघु और सूक्ष्म उद्योगों को जो संरक्षण दे रहे हैं उसे बंद करने जा रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस बड़े व्यापार समझौते की बात की है, उसके पीछे रहस्य क्या है, वास्तविकता क्या है? यह इतना बड़ा समझौता है कि इसकी वजह से आपने ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया? यह देश पूछ रहा है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कभी भी भारत के संविधान को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। 30 नवंबर 1949 से ही उसने डॉ. अंबेडकर, नेहरू और संविधान निर्माण से जुड़े अन्य लोगों पर हमले किए। स्वयं आरएसएस के शब्दों में, यह संविधान मनुस्मृति से प्रेरित नहीं था।
आरएसएस और बीजेपी ने बार-बार नए संविधान की मांग उठाई है। 2024 के लोकसभा चुनाव में यही प्रधानमंत्री मोदी का चुनावी नारा था। लेकिन भारत की जनता ने इस नारे को निर्णायक रूप से खारिज कर दिया। फिर भी, संविधान की मूल ढांचे को बदलने की मांग लगातार आरएसएस इकोसिस्टम द्वारा की जाती रही है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने स्वयं 25 नवंबर 2024 को उसी मुद्दे पर एक फैसला सुनाया था, जिसे अब एक प्रमुख आरएसएस पदाधिकारी द्वारा फिर से उठाया जा रहा है। क्या वे कम से कम उस फैसले को पढ़ने का कष्ट करेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 16 बार दोहराया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम करवाने के लिए एक व्यापारिक समझौते को औजार की तरह इस्तेमाल किया। अब उन्होंने घोषणा की है कि भारत-अमेरिका के बीच यह व्यापार समझौता पर कुछ ही दिनों में दस्तखत होने जा रहा है। वे इसे बहुत बड़ी डील कह रहे हैं। उम्मीद है कि यह वाकई बड़ी डील हो, क्योंकि इसी वजह से ऑपरेशन सिन्दूर को अचानक बंद कर दिया गया। जैसा कि अब साफ होता जा रहा है, भारत से जुड़े बेहद अहम फैसलों की जानकारी भी वॉशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस से ही मिल रही है।