अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा टल गया, जब Pawan Hans का एक हेलिकॉप्टर उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। स्थिति गंभीर होती देख पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलिकॉप्टर को समुद्र में इमरजेंसी लैंडिंग कराई। राहत की बात यह रही कि हेलिकॉप्टर में सवार सभी सात लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है।
यह हेलिकॉप्टर Port Blair से Mayabunder की ओर जा रहा था। जानकारी के मुताबिक, इसमें दो क्रू मेंबर और पांच यात्री सवार थे। घटना सुबह करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद हेलिकॉप्टर में तकनीकी समस्या आ गई, जिससे स्थिति अचानक बिगड़ गई।
पायलट ने तुरंत हालात का आकलन किया और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा फैसला लिया। अधिकारियों के अनुसार, हेलिकॉप्टर को मायाबंदर में निर्धारित रनवे से करीब 300 मीटर पहले समुद्र में उतारा गया। यह एक जोखिम भरा कदम था, लेकिन पायलट की कुशलता और अनुभव के कारण सभी लोग सुरक्षित बच गए।
स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना ने एक बार फिर आपात स्थिति में पायलट की भूमिका और प्रशिक्षण की अहमियत को उजागर किया है। शुरुआती जांच में तकनीकी खराबी को इस घटना का कारण बताया जा रहा है, हालांकि वास्तविक वजह जानने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
इस घटना के साथ ही एक और हवाई हादसा टलने की खबर सामने आई। SpiceJet की दिल्ली से लेह जा रही एक उड़ान भी तकनीकी खराबी के कारण वापस लौट आई। उड़ान संख्या SG121, जिसे बोइंग 737 विमान संचालित कर रहा था, में करीब 150 यात्री सवार थे।
उड़ान के दौरान इंजन में खराबी आने के संकेत मिलने पर पायलट ने तुरंत निर्णय लेते हुए विमान को वापस दिल्ली लाने का फैसला किया। विमान ने सुरक्षित रूप से दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंडिंग की और सभी यात्रियों को बिना किसी परेशानी के उतार लिया गया।
एयरलाइन के प्रवक्ता ने बताया कि कॉकपिट में आग लगने की कोई चेतावनी नहीं थी, लेकिन एहतियात के तौर पर उड़ान को वापस लाना जरूरी समझा गया। इस तरह समय रहते उठाए गए कदमों ने एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया।
इन दोनों घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि तकनीकी खराबियां कभी भी सामने आ सकती हैं, लेकिन सही समय पर लिए गए फैसले और प्रशिक्षित क्रू के कारण यात्रियों की जान बचाई जा सकती है। फिलहाल दोनों मामलों की जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां तकनीकी कारणों का पता लगाने में जुटी हैं।