भारत की संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर 2025 से 19 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस सत्र को बुलाने के लिए केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस संबंध में जानकारी केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से साझा की। उन्होंने बताया कि यह सत्र संसदीय कार्य की आवश्यकताओं के अनुरूप चलेगा और उम्मीद जताई कि यह सत्र रचनात्मक, सार्थक और लोकतंत्र को सशक्त करने वाला साबित होगा।
मानसून सत्र में हंगामे से बर्बाद हुए घंटे
इससे पहले संसद का मानसून सत्र 21 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। विपक्ष के विरोध और हंगामे की वजह से लगभग 166 घंटे की कार्यवाही बाधित रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे जनता के करदाताओं का करीब ₹248 करोड़ का नुकसान हुआ। लोकसभा की कार्यवाही के 84.5 घंटे और राज्यसभा की 81.12 घंटे बेकार गए। सामान्यत: एक मिनट की संसदीय कार्यवाही पर लगभग ₹2.5 लाख का खर्च आता है, यानी एक घंटे की कार्यवाही का खर्च लगभग ₹1.5 करोड़ बैठता है। इसके बावजूद सत्र के अंतिम नौ कार्य दिवसों में तेजी से विधायी कार्य पूरे किए गए, जिनमें राज्यसभा में 15 और लोकसभा में 12 विधेयक पारित हुए।
संसद के वार्षिक तीन प्रमुख सत्र
भारतीय संसद में सामान्यत: एक वर्ष में तीन प्रमुख सत्र आयोजित किए जाते हैं।
बजट सत्र (फरवरी से मई): इस दौरान वार्षिक बजट पर चर्चा, मतदान और अनुमोदन किया जाता है।
मानसून सत्र (जुलाई से अगस्त): इसमें संसद विभिन्न विधेयकों और नीतियों पर विचार करती है।
शीतकालीन सत्र (नवंबर से दिसंबर): साल का अंतिम सत्र, जिसमें सरकार वर्ष के अंत में अपने प्रमुख विधायी कार्य पूरे करती है।
केंद्र सरकार को उम्मीद है कि इस बार का शीतकालीन सत्र बेहतर समन्वय और सहयोग के साथ चलेगा। संसद में होने वाली चर्चाओं और विधायी प्रक्रियाओं के माध्यम से देश के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।