इस्लामाबाद/नई दिल्ली: आर्थिक बदहाली और ऊर्जा संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की हालत अब ‘दाने-दाने’ के बाद ‘बूंद-बूंद’ तेल के लिए भी मोहताज हो गई है. ईरान युद्ध के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद होने से दक्षिण एशियाई देशों में तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई है. इसका सबसे भयावह असर पाकिस्तान में देखने को मिल रहा है, जहाँ पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) ने विदेशी एयरलाइंस के लिए एक तुगलकी फरमान जारी कर दिया है.
विदेशी एयरलाइंस के लिए ‘नो फ्यूल’ जोन बना पाकिस्तान
पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ने ‘नोटिस टू एयरमैन’ (NOTAM) जारी कर साफ कर दिया है कि अब विदेशी विमानों को पाकिस्तान की धरती पर वापसी के लिए ईंधन नहीं दिया जाएगा. पीएए ने सभी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को सलाह दी है कि वे अपने साथ इतना पर्याप्त तेल लेकर आएं कि उन्हें वापस जाने के लिए पाकिस्तान पर निर्भर न रहना पड़े.
अधिकारियों के मुताबिक, जेट A-1 फ्यूल की भारी किल्लत के चलते यह एहतियाती कदम उठाया गया है. हालांकि, यह नियम फिलहाल घरेलू एयरलाइंस पर लागू नहीं होगा, उन्हें जरूरत के हिसाब से पाकिस्तान में ही तेल उपलब्ध कराया जाएगा. लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए पाकिस्तान अब एक ‘स्टॉप-ओवर’ मात्र बनकर रह गया है, जहाँ ईंधन की सुविधा पूरी तरह ठप है.
भारत में भी विमान ईंधन की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल
ईरान और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारतीय आसमान पर भी दिखने लगा है. भारत में एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई ईंधन की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं. पहली बार एटीएफ की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के जादुई आंकड़े को पार कर गई है.
दिल्ली में हवाई ईंधन की कीमत 96,638.14 रुपये से सीधे बढ़कर 2,07,341.22 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है. कीमतों में आए इस दोगुने से अधिक के उछाल ने एयरलाइंस कंपनियों की कमर तोड़ दी है.
फ्लाइट टिकट होंगे महंगे, सरकार ने दिया ‘सुरक्षा कवच’
ईंधन की कीमतों में इस भारी बढ़त के बाद अब हवाई सफर करना जेब पर भारी पड़ने वाला है. घरेलू रूट्स पर उड़ान भरने वाली एयरलाइंस के लिए सरकार ने एक राहत भरा फैसला लिया है. घरेलू मार्गों पर एटीएफ की बढ़ी हुई कीमतों का केवल 25 प्रतिशत (करीब 15 रुपये प्रति लीटर) ही वसूला जाएगा, और वह भी चरणबद्ध तरीके से लागू होगा.
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए कोई राहत नहीं दी गई है. विदेशी रूट पर जाने वाली एयरलाइंस को एटीएफ की पूरी बढ़ी हुई कीमत चुकानी होगी, जिसका सीधा असर टिकटों के दाम पर पड़ेगा. आने वाले दिनों में विदेश जाना काफी महंगा हो सकता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: संकट की असली जड़
वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते गुजरता है. ईरान युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग के बंद होने से सप्लाई चेन पूरी तरह ठप पड़ गई है. इसी वजह से दक्षिण एशियाई देशों, खासकर पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देशों में तेल का स्टॉक खत्म होने की कगार पर पहुँच गया है.