ओवैसी का केंद्र पर तीखा प्रहार — “GST सुधारों ने राज्यों की आर्थिक स्थिति को किया कमजोर”

जीएसटी में राहत या राज्यों पर चोट? — ओवैसी का सवाल, मुआवजे का जवाब कौन देगा?

Vin News Network
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बीआरएस विवाद पर ओवैसी का बयान: “केसीआर के बिना पार्टी कुछ नहीं”
Highlights
  • केंद्र सरकार राज्यों के लिए मुआवजा तंत्र देने में विफल
  • राज्यों को सेस और सर्चार्ज का कोई हिस्सा नहीं मिलता
  • खपत बढ़ने की दलील को बताया “खोखला संवाद”

हैदराबाद। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को केंद्र सरकार की नई जीएसटी दरों को लेकर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों में की गई कटौती से हर राज्य को 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक के राजस्व का नुकसान हो सकता है, जिसका राज्यों की वित्तीय स्थिति पर “अनुपातहीन असर” पड़ेगा।

ओवैसी का यह बयान जीएसटी काउंसिल की 3 सितंबर को हुई बैठक के बाद आया है, जिसमें दो नई दरों – 5% और 18% की संरचना को मंजूरी दी गई, जो 22 सितंबर से लागू होंगी। इन दरों के तहत कई वस्तुएं सस्ती होंगी, लेकिन ओवैसी के अनुसार, इसका खामियाजा राज्यों को उठाना पड़ेगा।

ओवैसी के मुख्य आरोप: केंद्र कर रहा है राज्यों के साथ नाइंसाफी
पत्रकारों से बातचीत में ओवैसी ने साफ कहा कि जीएसटी दरों में कटौती केवल केंद्र की राजनीतिक रणनीति है, जिसका असली असर राज्यों के बजट और योजनाओं पर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार पर कई सवाल खड़े किए: कटौती के बदले राजस्व की भरपाई के लिए कोई मुआवजा तंत्र तय नहीं किया गया। राज्यों को सेस और सर्चार्ज में कोई हिस्सा नहीं मिलता, जिससे उनका बजट और कमजोर होता जा रहा है। नई दरें तो घोषित कर दी गईं लेकिन वित्तीय क्षतिपूर्ति पर कोई योजना नहीं बताई गई। हर राज्य को होगा 8,000 से 10,000 करोड़ का घाटा। ओवैसी ने कहा: “इस नई दरों की संरचना से राज्यों की आमदनी को गंभीर झटका लगेगा। हर राज्य को 8 से 10 हज़ार करोड़ रुपये तक का नुकसान होगा। केंद्र ने इसकी भरपाई के लिए किसी भी प्रकार के क्षतिपूर्ति मॉडल का जिक्र नहीं किया है। यह निर्णय राज्यों की वित्तीय स्वतंत्रता पर आघात है।” उन्होंने इस फैसले को “जनविरोधी और तुगलकी” करार देते हुए कहा कि इससे केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संतुलन और बिगड़ेगा।

“खपत बढ़ेगी” की दलील पर ओवैसी की प्रतिक्रिया: ‘खोखला संवाद’
जब पत्रकारों ने पूछा कि दरें कम होने से जनता के पास ज्यादा पैसा बचेगा, जिससे खपत और टैक्स कलेक्शन दोनों बढ़ सकते हैं, तो ओवैसी ने इस तर्क को “बयानबाजी और खोखले संवाद” कहा। उन्होंने जोड़ा: “पिछले 11 सालों से यही तर्क सुनते आ रहे हैं। लेकिन न तो महंगाई कम हुई, न ही आम आदमी को कोई फायदा हुआ। आर्थिक नीतियां ज़मीनी सच्चाई से नहीं, बल्कि पूंजीपतियों के फायदे के लिए बनाई जा रही हैं।”

राज्यों को उपकर और अधिभार से नहीं मिलता हिस्सा
ओवैसी ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए सेस और अधिभार (सर्चार्ज) राज्यों के साथ साझा नहीं किए जाते। इससे राज्यों के पास योजनाओं को चलाने और विकास कार्यों को लागू करने के लिए जरूरी फंड की कमी हो जाती है। उन्होंने मांग की कि जीएसटी कटौती के प्रभाव को संतुलित करने के लिए केंद्र को क्षतिपूर्ति फंड या स्पेशल ग्रांट्स की घोषणा करनी चाहिए।

बीआरएस में कलह पर ओवैसी का बयान: “केसीआर के बिना कुछ नहीं है पार्टी”
बातचीत के दौरान जब पूर्व बीआरएस नेता के. कविता के इस्तीफे पर सवाल किया गया, तो ओवैसी ने टिप्पणी की कि: “बीआरएस पार्टी केवल केसीआर (के. चंद्रशेखर राव) की वजह से है। उनके बिना पार्टी का कोई वजूद नहीं है। मैं केसीआर का सम्मान करता हूं।” बता दें कि 3 सितंबर को कविता ने बीआरएस से इस्तीफा देने की घोषणा की थी, जिसके एक दिन पहले उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने पूर्व मंत्री टी. हरीश राव पर निशाना साधते हुए कहा था कि उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए केसीआर पर दबाव बनाया गया। कविता ने तेलंगाना विधान परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफा देने का ऐलान किया है।

राजनीतिक विश्लेषण: ओवैसी केंद्र के खिलाफ विपक्ष की धुरी बनने की ओर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असदुद्दीन ओवैसी अब राज्यों के अधिकार और आर्थिक स्वायत्तता की लड़ाई में भी केंद्र सरकार के विरोध में खुलकर सामने आ रहे हैं। इससे उनकी भूमिका सिर्फ धार्मिक और अल्पसंख्यक मुद्दों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वे अब वित्तीय और संघीय नीति पर भी मुखर हो रहे हैं।

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