जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में ईरान पर थोपे गए युद्ध और भारत-ईरान संबंधों पर विस्तृत बयान दिया और कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारत और ईरान के संबंध मजबूत रहे हैं, जिसे उन्होंने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर देखा जब वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में विदेश राज्य मंत्री थे। उन्होंने कहा कि भारत के ईरान के पड़ोसी देशों के साथ भी अच्छे संबंध हैं और यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
उमर अब्दुल्ला ने सदन से अपील की कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने पद और व्यक्तिगत कूटनीतिक संबंधों का इस्तेमाल कर इस युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त कराने में मदद करें ताकि वहां के लोगों की पीड़ा कम हो और ईरान दुनिया के साथ शांतिपूर्ण रूप से जुड़ सके। उन्होंने इस युद्ध को “अन्यायपूर्ण और अवैध” करार दिया और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके सहयोगियों और संघर्ष में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका और इजराइल के बयान स्पष्ट नहीं हैं और यह संघर्ष न केवल ईरान बल्कि वैश्विक स्थिरता और भारत पर भी प्रभाव डालता है, क्योंकि भारतीय नागरिक ईरान में हैं और इसका असर पेट्रोल, तेल कीमतों और आम जनता पर भी पड़ रहा है।
उमर अब्दुल्ला ने सदन की कार्यवाही के दौरान कहा कि कितनी भी निंदा करें, मानवता पर हुए अत्याचार और निर्दोष लोगों की मौत को शब्दों में पूरी तरह नहीं बयां किया जा सकता। उन्होंने स्कूल पर हुए बमबारी और बड़ी संख्या में छात्राओं की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि हाल के समय में इससे अधिक भयावह घटना नहीं हुई। सदन में इस मुद्दे को लेकर हंगामा हुआ और कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा, क्योंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई विधायकों ने बयान की मांग की जबकि बीजेपी के विधायकों ने विरोध जताया।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस मामले में सभी उपलब्ध कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि मानवता और क्षेत्रीय शांति दोनों सुरक्षित रहें, और यह भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति में उसकी भूमिका को दर्शाता है। इस बयान से स्पष्ट होता है कि भारत न केवल अपने पड़ोसी देशों के साथ ऐतिहासिक संबंध बनाए रखता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के मानवतावादी और कूटनीतिक पहलुओं पर भी सक्रिय भूमिका निभाने का प्रयास करता है।