NIRF रैंकिंग 2025: कल आएगी टॉप 100 कॉलेज और यूनिवर्सिटी की लिस्ट

कल आएगी NIRF 2025 लिस्ट – टॉप 100 कॉलेज और यूनिवर्सिटी पर सबकी निगाहें

Vin News Network
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NIRF 2025: जानिए कौन होगा देश का नंबर वन संस्थान
Highlights
  • 4 सितंबर को जारी होगी NIRF 2025 रैंकिंग।
  • पहली बार रिसर्च पेपर वापस लेने पर नेगेटिव मार्किंग का नियम लागू।
  • पिछले साल IIT मद्रास, IISc बेंगलुरु और एम्स दिल्ली ने किया था टॉप।

नई दिल्ली। देशभर के छात्रों और शिक्षा संस्थानों की नजर कल यानी 4 सितंबर 2025 पर टिकी है। इसी दिन शिक्षा मंत्रालय नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) 2025 की लिस्ट जारी करने वाला है। हर साल की तरह इस बार भी टॉप 100 संस्थानों की रैंकिंग ओवरऑल और अलग-अलग कैटेगरी – इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, मेडिकल, लॉ, फार्मेसी समेत कई क्षेत्रों में जारी होगी। खास बात यह है कि इस साल रैंकिंग के नियमों में कुछ नए बदलाव किए गए हैं।

NIRF क्या है?
नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) की शुरुआत 2015 में की गई थी। इसका उद्देश्य देश के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और छात्रों को सही विकल्प चुनने में मदद करना है। रैंकिंग के लिए संस्थानों का मूल्यांकन कई मानकों के आधार पर किया जाता है, जैसे:

  • शिक्षण और अधिगम संसाधन (Teaching & Learning Resources)
  • रिसर्च और प्रोफेशनल प्रैक्टिस
  • ग्रेजुएशन आउटकम्स (पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के परिणाम)
  • आउटरीच और समावेशिता
  • पीयर परसेप्शन (छात्रों और समाज की राय)

इन्हीं मानकों पर संस्थानों को अंक दिए जाते हैं और फिर अंतिम रैंकिंग तय होती है।

इस बार के बदलाव
इस साल रैंकिंग में कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं:

  • रिसर्च पेपर वापस लेने पर नेगेटिव मार्किंग
  • अगर कोई संस्थान रिसर्च पेपर पब्लिश करने के बाद उसे वापस लेता है, तो उसके अंक काटे जाएंगे।
  • इससे शोध कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहेगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और सतत विकास लक्ष्यों पर फोकस
पिछले साल की तरह इस बार भी भारतीय ज्ञान प्रणाली, क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट ऑप्शन को रैंकिंग का हिस्सा बनाया गया है।

रैंकिंग में देरी क्यों हुई?
इस साल रैंकिंग की घोषणा थोड़ी देर से हो रही है। इसका कारण मद्रास हाईकोर्ट का आदेश था। कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए रैंकिंग जारी करने पर अस्थायी रोक लगा दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि डेटा में पारदर्शिता की कमी है और कई संस्थानों की जानकारी सही तरीके से शामिल नहीं की जाती। हालांकि अब मामला सुलझ चुका है और शिक्षा मंत्रालय ने 4 सितंबर को रैंकिंग जारी करने की तारीख तय कर दी है।

पिछले साल का परिणाम
पिछले साल की NIRF रैंकिंग 2024 में इन संस्थानों ने टॉप किया था:

  • ओवरऑल कैटेगरी: IIT मद्रास
  • यूनिवर्सिटी: IISc बेंगलुरु
  • कॉलेज: हिंदू कॉलेज, दिल्ली
  • इंजीनियरिंग: IIT मद्रास
  • मैनेजमेंट: IIM अहमदाबाद
  • मेडिकल: एम्स दिल्ली
  • फार्मेसी: जामिया हमदर्द
  • लॉ: नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु
  • 2024 में कुल 10,885 संस्थानों ने आवेदन किया था। अनुमान है कि 2025 में यह संख्या और भी बढ़ सकती है।

छात्रों के लिए क्यों अहम है यह रैंकिंग?
भारत में उच्च शिक्षा पाने वाले छात्रों के लिए NIRF रैंकिंग बेहद अहम है क्योंकि: यह संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता और रिसर्च क्षमता को दिखाती है। छात्रों को भविष्य की पढ़ाई और करियर विकल्प तय करने में मदद करती है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी के बीच गुणवत्ता सुधार की प्रतिस्पर्धा को बढ़ाती है।

कल पर सबकी निगाहें
अब सबकी नजर कल यानी 4 सितंबर पर टिकी है। IITs, IIMs और शीर्ष यूनिवर्सिटी के बीच टॉप रैंक के लिए मुकाबला होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या IIT मद्रास और IISc बेंगलुरु फिर से अपनी बादशाहत कायम रख पाते हैं या कोई नया संस्थान बाजी मारता है।

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