नई दिल्ली – दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने नेशनल हेराल्ड मामले में एक नई FIR दर्ज की है। इस FIR में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी के अलावा कुल आठ लोगों और तीन कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। यह मामला लंबे समय से सुर्खियों में रहा है, क्योंकि इसमें Associated Journals Limited (AJL) और Young Indian Private Limited जैसी कंपनियों से जुड़े वित्तीय और संपत्ति संबंधी आरोप शामिल हैं।
नई FIR में कुल आठ व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। प्रमुख नाम हैं: सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे और सुनील भंडारी। इसके अलावा तीन कंपनियों को भी FIR में शामिल किया गया है। ये कंपनियां हैं Associated Journals Limited (AJL), Young Indian Private Limited और Dotex Merchandise Pvt Ltd।
FIR में आरोप है कि AJL की संपत्तियों का Young Indian को हस्तांतरण एक आपराधिक साज़िश के तहत किया गया। बताया गया है कि इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग ₹2,000 करोड़ था, लेकिन Young Indian ने इसे केवल ₹50 लाख में हासिल किया। FIR में यह भी कहा गया है कि Dotex Merchandise ने Young Indian को करीब ₹1 करोड़ भेजे, जिससे Young Indian ने AJL की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल किया।
पुलिस ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में धोखाधड़ी, विश्वासघात और संपत्ति का गैरकानूनी हड़पना शामिल था। FIR में IPC की धारा 120B, 403, 406 और 420 के तहत आपराधिक साज़िश, धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति हड़पने का मामला दर्ज किया गया है।
यह मामला 2012 से चर्चा में है, जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने AJL और Young Indian के बीच वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाया था। इसके बाद कई सालों तक जांच चली और 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चार्जशीट दायर की। ED का दावा था कि Young Indian, जो सोनिया और राहुल गांधी के नियंत्रण में है, ने AJL की संपत्तियों को अवैध रूप से अपने कब्जे में लिया। अब EOW ने FIR दर्ज कर इसे और मजबूत किया है।
FIR में शामिल संपत्तियों में दिल्ली का Herald House, मुंबई का AJL House और लखनऊ की एक संपत्ति शामिल है। इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग ₹2,000 करोड़ बताया गया है। आरोप है कि Young Indian ने केवल ₹50 लाख में इन संपत्तियों को हासिल किया। FIR में कहा गया है कि यह पूरी प्रक्रिया एक आपराधिक साज़िश के तहत की गई।
नई FIR के बाद मामला फिर से राजनीतिक और कानूनी सुर्खियों में आ गया है। अभी तक अदालत ने FIR का संज्ञान नहीं लिया है। अगली सुनवाई 16 दिसंबर 2025 को तय हुई है। यदि अदालत FIR को स्वीकार करती है, तो आरोपियों के खिलाफ मनी‑लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी और आपराधिक साज़िश की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
जैसे ही FIR दर्ज होने की खबर आई, कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। पार्टी का कहना है कि यह मामला बेबुनियाद है और इसमें राजनीतिक दबाव है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई केवल उनके खिलाफ राजनैतिक लाभ के लिए की जा रही है। पार्टी का दावा है कि संपत्ति का कोई वास्तविक बंटवारा नहीं हुआ और सिर्फ कागजी हेराफेरी के आधार पर FIR दर्ज की गई है।
नई FIR ने नेशनल हेराल्ड मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। यह केवल संपत्ति और वित्तीय विवाद नहीं है, बल्कि राजनीतिक शक्ति, मीडिया और अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाई का मुद्दा भी बन गया है। आने वाले महीनों में अदालत की कार्रवाई, गवाहों की जांच और वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा इस मामले में अहम भूमिका निभाएगी।
इस FIR के बाद मामला और भी पेचीदा हो गया है और आने वाले दिनों में इसकी कानूनी और राजनीतिक दिशा दोनों पर देश की नजरें टिकी रहेंगी। यह मामला भारत के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें राजनीतिक नेता, बड़ी कंपनियों की संपत्तियां और कानूनी जाँच सभी जुड़े हैं।