यरूशलेम: इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। इजरायल ने साफ कर दिया है कि उसकी सेना (IDF) जमीनी हमले (Ground Operation) के लिए ईरान की सीमा के अंदर दाखिल नहीं होगी। इजरायली मीडिया ‘चैनल 12’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने यह फैसला अपनी सीमाओं की सुरक्षा और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ चल रहे मोर्चे को प्राथमिकता देने के लिए लिया है।
इजरायल के इस “नो ग्राउंड वार” के ऐलान को अमेरिका के लिए एक बहुत बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। अब तक यह माना जा रहा था कि ईरान के खिलाफ किसी भी जमीनी कार्रवाई में इजरायल और अमेरिका कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेंगे। लेकिन अब इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल हवाई और समुद्री हमलों तक ही सीमित रहेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर अमेरिका ईरान के भीतर घुसकर युद्ध लड़ना चाहता है, तो उसे यह जोखिम अकेले ही उठाना होगा।
अमेरिका के लिए बढ़ी मुश्किलें
इजरायल के इस कदम ने वाशिंगटन में खलबली मचा दी है। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नेतन्याहू के इस फैसले ने राष्ट्रपति ट्रंप की युद्ध नीति को अधर में लटका दिया है। इजरायल का तर्क है कि वह पहले से ही कई मोर्चों (गाजा और लेबनान) पर लड़ रहा है और ईरान के विशाल भूगोल में जमीनी सेना उतारना उसके लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका तकनीकी सहयोग और खुफिया जानकारियों के भरोसे अकेले ईरान में उतरने का साहस दिखाएगा? या फिर इजरायल के इस कदम के बाद युद्ध की दिशा पूरी तरह बदल जाएगी? फिलहाल, इजरायल ने अपना पल्ला झाड़कर यह साफ कर दिया है कि “जमीन की जंग” उसकी प्राथमिकता नहीं है।