कांग्रेस की लोकसभा सांसद एस. जोतिमणि ने शुक्रवार को तमिलनाडु कांग्रेस में चल रही आंतरिक कलह पर खुलकर नाराज़गी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की राज्य इकाई कुछ नेताओं की स्वार्थी राजनीति के कारण धीरे-धीरे विनाश की राह पर बढ़ रही है। जोतिमणि के मुताबिक, लगातार चल रही गुटबाज़ी और आपसी खींचतान से न सिर्फ कार्यकर्ताओं में थकान बढ़ रही है, बल्कि पार्टी की साख और संगठनात्मक मजबूती भी कमजोर हो रही है।
खुले असंतोष के इस बयान में जोतिमणि ने तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य इकाई जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, वह पार्टी नेता राहुल गांधी द्वारा प्रचारित निस्वार्थ, सिद्धांतवादी और निर्भीक राजनीति के बिल्कुल उलट है। उनके अनुसार, कांग्रेस की मूल विचारधारा और मूल्यों से यह भटकाव पार्टी के भविष्य के लिए खतरनाक संकेत है।
जोतिमणि ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से जनहित, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की राजनीति के लिए जानी जाती रही है। लेकिन तमिलनाडु में मौजूदा हालात इस परंपरा के अनुरूप नहीं दिखते। उन्होंने यह भी इशारा किया कि कुछ नेता व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को संगठन और जनता के हितों से ऊपर रख रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर अविश्वास और असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव मार्च–अप्रैल में होने हैं। चुनाव से पहले पार्टी में एकजुटता और स्पष्ट रणनीति की जरूरत होती है, लेकिन इसके उलट राज्य कांग्रेस रोज़ाना गलत वजहों से सुर्खियों में बनी हुई है। जोतिमणि के अनुसार, मीडिया में पार्टी का जिक्र जनता के मुद्दों, नीतियों या सरकार से जुड़े सवालों को लेकर नहीं, बल्कि आंतरिक विवादों और बयानबाज़ी के कारण हो रहा है।
सांसद ने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि चुनावी समय में ऐसी खबरें कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मनोबल गिराती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लगातार चल रही खींचतान से जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता हताश हो रहे हैं और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि पार्टी की प्राथमिकताएं क्या हैं। इससे संगठन की चुनावी तैयारी पर भी सीधा असर पड़ सकता है।
जोतिमणि ने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर सुधार और आत्ममंथन की तत्काल जरूरत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को फिर से जनता के मुद्दों पर फोकस करना चाहिए—जैसे रोज़गार, महंगाई, सामाजिक कल्याण और लोकतांत्रिक अधिकार। उनके मुताबिक, अगर पार्टी नेतृत्व और राज्य इकाई समय रहते हालात नहीं संभालती, तो इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी दोहराया कि राहुल गांधी जिस तरह की राजनीति की बात करते हैं—जो डर से मुक्त, सिद्धांतों पर आधारित और आम लोगों के लिए समर्पित हो उसे ज़मीन पर उतारना ज़रूरी है। जोतिमणि के अनुसार, यही कांग्रेस की असली पहचान है और इसी रास्ते पर चलकर ही पार्टी दोबारा भरोसा जीत सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जोतिमणि का बयान तमिलनाडु कांग्रेस में बढ़ते असंतोष को सार्वजनिक रूप से सामने लाता है। विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की खुली आलोचना यह संकेत देती है कि पार्टी के भीतर मतभेद गहरे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि केंद्रीय नेतृत्व और टीएनसीसी इस चेतावनी को किस तरह लेता है और क्या समय रहते संगठनात्मक एकता और दिशा स्पष्ट करने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।
एस. जोतिमणि का यह बयान न सिर्फ तमिलनाडु कांग्रेस के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि चुनावी सफलता के लिए एकजुटता, स्पष्ट नेतृत्व और जनता-केंद्रित राजनीति कितनी जरूरी है।