उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के घोषीपुरवा मोहल्ले में 23 नवंबर 2025 को हुई मां-बेटी की हत्या का पुलिस ने 11 दिन बाद सनसनीखेज खुलासा कर दिया है। जांच में पता चला कि यह हत्या किसी बाहरी हमलावर ने नहीं की, बल्कि परिवार का ही परिचित युवक राजत वारदात का आरोपी था।
घटना की रात बुजुर्ग महिला शांति जायसवाल और उनकी अधेड़ बेटी विमला जायसवाल घर में अकेली थीं। पुलिस के अनुसार, राजत ने आर्थिक तंगी और फिजूलखर्ची के कारण यह हत्या की योजना बनाई थी। उसने दोनों को शराब पिलाई और नशे में होने पर हथौड़े से सिर पर वार कर हत्या कर दी। इसके बाद उसने घर से लगभग ₹4.50 लाख नकद और सोने का ब्रेसलेट लूट लिया।
शुरुआत में पुलिस के सामने मामला काफी जटिल था क्योंकि हथौड़े पर कपड़ा लिपटा होने के कारण फिंगरप्रिंट नहीं मिले और घर में किसी तरह का संघर्ष भी नहीं दिखा। इसी वजह से शुरुआत में यह अंदेशा था कि हमला बाहरी व्यक्ति द्वारा किया गया।
हालांकि, पुलिस ने 800 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और 200 मोबाइल नंबरों की डिटेल चेक की। मोहल्ले और परिवार के कई लोगों से पूछताछ के बाद शक राजत की तरफ बढ़ा। जब उसे हिरासत में लिया गया तो उसने पूरी वारदात स्वीकार कर ली। आरोपी के निशानदेही पर पुलिस ने लूटी गई नकदी, सोने के गहने, हथौड़ा और बाइक भी बरामद की।
एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि राजत परिवार का बेहद करीबी था और उसने इसी का फायदा उठाकर वारदात को शातिराना ढंग से अंजाम दिया। इस मामले में आरोपी पर पहले से मारपीट के दो मामले भी दर्ज हैं।
पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच के कारण यह डबल मर्डर मिस्ट्री 11 दिन में सुलझा और आरोपी को न्याय के सामने लाया गया। इस घटना ने दिखाया कि कभी-कभी खतरा घर और परिचितों के पास भी हो सकता है।
घटना ने मोहल्ले में भय और दहशत का माहौल बना दिया था। वहीं, जांच पूरी होने और आरोपी को गिरफ्तार किए जाने के बाद इलाके में लोगों को राहत मिली। यह मामला समाज को चेतावनी भी देता है कि लालच और आर्थिक तंगी अपराध की ओर ले जा सकती है।
इस घटना का पर्दाफाश पुलिस की सतर्कता, फोरेंसिक जांच और तकनीकी साधनों के उपयोग की सफलता का उदाहरण भी है।