अंबेडकरनगर। अयोध्या जिले से सटे अंबेडकरनगर में पिछले एक महीने के भीतर 70 से अधिक लड़कियों के लापता होने की घटनाओं ने प्रशासन और समाज को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 56 लड़कियों के अपहरण की एफआईआर दर्ज हुई है, जबकि 15 से अधिक मामलों में परिजन सामाजिक बदनामी के डर से शिकायत दर्ज नहीं करा पाए। इन मामलों में अब तक 17 गुमशुदगियों में मुस्लिम युवकों के नाम सामने आए हैं, जिससे यह मामला और संवेदनशील हो गया है। कई हिंदू संगठनों ने इसे ‘लव जिहाद’ और ‘मतांतरण’ की साजिश करार दिया है।
अनुसूचित जाति व आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियां सबसे अधिक प्रभावित
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गुमशुदा हुई लड़कियों में अधिकतर अनुसूचित जाति और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। समाजशास्त्रियों का मानना है कि कमजोर आर्थिक स्थिति और शिक्षा की कमी के कारण इन परिवारों की बेटियां अधिक संवेदनशील होती हैं। इन मामलों में आरोपी युवकों द्वारा प्रेम संबंधों का झांसा देने, मोबाइल फोन व नकद रुपयों का लालच देने और बेहतर जीवन के वादे करने जैसी बातों के खुलासे पुलिस की शुरुआती जांच में हुए हैं।
थाना-वार एफआईआर विवरण
अगस्त महीने में दर्ज अपहरण के मामलों की थाना-वार स्थिति इस प्रकार है –
- अकबरपुर: 11
- मालीपुर: 9
- जलालपुर: 8
- अहिरौली: 7
- बसखारी: 6
- जैतपुर: 5
- महरुआ व सम्मनपुर: 3-3
- इब्राहिमपुर व भीटी: 2-2
इन आंकड़ों से पता चलता है कि घटनाएं लगभग पूरे जिले में फैली हुई हैं और कोई एक थाना क्षेत्र इस समस्या से अछूता नहीं है।
पुलिस की जांच और शुरुआती निष्कर्ष
अंबेडकरनगर पुलिस ने हर थाने में अलग-अलग टीम बनाकर गुमशुदा लड़कियों की खोज शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर, मोबाइल फोन और रुपयों के लालच में, उन्हें घर से बाहर ले जाया जाता है। पुलिस ने कुछ संदिग्ध युवकों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। इसके अलावा, जिले के विभिन्न स्थानों पर संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “हम हर शिकायत को गंभीरता से ले रहे हैं। विशेष टीम बनाई गई है। जो परिवार शिकायत नहीं कर पा रहे हैं, उनसे भी हम अपील कर रहे हैं कि वे आगे आएं।’’
हिंदू संगठनों में आक्रोश, ‘लव जिहाद’ का आरोप
इतनी बड़ी संख्या में लड़कियों के गायब होने पर कई हिंदू संगठनों ने नाराजगी जताई है। संगठनों का कहना है कि आर्थिक प्रलोभन के सहारे लड़कियों को फंसाकर ‘लव जिहाद’ और मतांतरण की साजिश रची जा रही है। कुछ संगठनों ने पुलिस और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जिन मामलों में मुस्लिम युवकों के नाम सामने आए हैं, उनमें त्वरित कार्रवाई कर पीड़ित परिवारों को न्याय दिया जाए।
प्रशासन की सतर्कता और भविष्य की योजना
जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी थानों को सतर्क रहने और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही गुमशुदा लड़कियों के परिजनों को मनोवैज्ञानिक परामर्श देने के लिए भी टीम गठित की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जिन मामलों में अभी शिकायत नहीं हुई है, वहां भी पुलिस संपर्क स्थापित कर रही है। प्रशासन ने सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों और भड़काऊ पोस्ट पर भी नजर रखी है।
समाज में बढ़ता डर और सवाल
इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। कई परिवार अपनी बेटियों को घर से बाहर भेजने में झिझक रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि सरकार इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे।