मोदी ने ट्रंप के बयान पर दिया सकारात्मक संदेश, भारत-अमेरिका साझेदारी को बताया मज़बूत

ट्रंप की मिश्रित टिप्पणियों के बाद मोडी का सकारात्मक संदेश – भारत-अमेरिका रिश्ते में मजबूती और संतुलन।

Vin News Network
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मोदी का संदेश – मित्रता और साझेदारी को मजबूत रखना।
Highlights
  • मोदी ने कहा– भारत-अमेरिका की साझेदारी सकारात्मक, दूरदर्शी और वैश्विक है
  • रूस-चीन को लेकर ट्रंप की टिप्पणी– “लगता है हमने भारत को चीन के हाथों खो दिया”
  • टैरिफ विवाद से खिंचाव– 50% आयात शुल्क और रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी नाराज़गी

नई दिल्ली/वॉशिंगटन – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को “अत्यंत सकारात्मक, दूरदर्शी, व्यापक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” करार दिया।

मोदी ने लिखा – “हम राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे संबंधों के सकारात्मक मूल्यांकन की तहे दिल से सराहना करते हैं। हम उनका पूर्ण समर्थन करते हैं। भारत और अमेरिका के बीच एक अत्यंत सकारात्मक, दूरदर्शी, व्यापक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है।” यह पोस्ट ट्रंप के उस बयान के बाद आई जिसमें उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर मोडी की तारीफ़ करते हुए कुछ नीतिगत असहमति भी जताई थी।

ट्रंप ने क्या कहा?
पिछले दिन ओवल ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा – “मैं हमेशा मोडी का दोस्त रहूँगा। वह एक महान प्रधानमंत्री हैं। लेकिन ईमानदारी से कहूँ तो मुझे इस समय उनके कुछ काम पसंद नहीं आ रहे। मगर भारत और अमेरिका के बीच एक खास रिश्ता है। चिंता की कोई बात नहीं।” एक पत्रकार ने पूछा था – “क्या आप भारत के साथ रिश्ते सुधारने को तैयार हैं?” इसके जवाब में ट्रंप ने यह बयान दिया।

रूस-चीन को लेकर ट्रंप की पोस्ट
ट्रंप ने इससे पहले ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पुरानी तस्वीर साझा की थी, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ दिख रहे थे। इस पोस्ट के साथ ट्रंप ने लिखा – “लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। ईश्वर करे कि उनका भविष्य लंबा और समृद्ध हो!” बाद में एक अन्य प्रतिक्रिया में ट्रंप ने कहा कि उन्हें निराशा है कि भारत रूस से इतना तेल खरीद रहा है। “हमने भारत पर बहुत ज्यादा टैरिफ लगाया है, 50 प्रतिशत टैरिफ। मेरे (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं, वह बहुत अच्छे हैं। वह कुछ महीने पहले यहां आए थे।”

टैरिफ विवाद और रिश्तों में खटास

अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त शुल्क और भारत पर कुल मिलाकर 50% टैरिफ लगाया। इस कदम से भारत-अमेरिका के रिश्तों में थोड़ी खटास देखी जा रही है।

इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में चीन के तियानजिन में आयोजित एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल हुए, जहां उन्होंने पुतिन और शी जिनपिंग के साथ गर्मजोशी से मुलाकात की। यह तस्वीरें वैश्विक मीडिया में खूब छपीं। इसके बाद ट्रंप अपने देश में ही आलोचनाओं में घिर गए। कई अमेरिकी नेताओं ने ट्रंप प्रशासन पर भारत से रिश्ते खराब करने का आरोप लगाया।

मोदी का कूटनीतिक संतुलन

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप की नाराज़गी के बावजूद अपने संदेश में व्यक्तिगत मित्रता और रणनीतिक साझेदारी पर ही जोर दिया। उन्होंने “सकारात्मक, दूरदर्शी और व्यापक” जैसे शब्दों से यह संकेत दिया कि भारत-अमेरिका रिश्ता अभी भी मजबूत है।

यह पोस्ट यह भी बताती है कि भारत रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के सिद्धांत पर चलते हुए भी अमेरिका के साथ अपनी निकटता बनाए रखना चाहता है।

इस बयानबाज़ी का महत्व

भूराजनैतिक स्थिरता – भारत-चीन तनाव के बीच अमेरिका के साथ मजबूत रिश्ते भारत के लिए अहम हैं।

आर्थिक हित – भारत अमेरिका का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, टैरिफ विवाद सुलझाना दोनों देशों के लिए ज़रूरी।

रणनीतिक संतुलन – मोडी ने SCO मंच पर बहुपक्षीयता को बढ़ावा दिया, पर अमेरिका को भी भरोसा दिलाया।

आगे की राह

द्विपक्षीय वार्ता: ऊर्जा और व्यापार क्षेत्र में जल्द ही नई बातचीत की संभावना।

जी20 और संयुक्त राष्ट्र: आने वाले वैश्विक मंचों पर दोनों देशों के बीच नए समीकरण बन सकते हैं।

बैकचैनल डायलॉग: सुरक्षा और विदेश मंत्रालयों के बीच पर्दे के पीछे चर्चा जारी रहने की उम्मीद।

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