दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शुक्रवार को यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया शर्टलेस प्रदर्शन देशभर में राजनीतिक हलचल पैदा कर गया। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य भारत-अमेरिका ट्रेड डील और सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जताना था। युवाओं ने अपने विरोध को दृश्यात्मक बनाने के लिए टी-शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया और ‘पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड’ जैसे नारे लगाए, जो तुरंत सोशल मीडिया और मीडिया कवरेज का हिस्सा बन गए।
दिल्ली पुलिस ने इस घटना को गंभीर माना और चार प्रमुख आरोपियों को शनिवार (21 फरवरी) को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने अदालत से उनकी 5 दिन की रिमांड मांगी। पुलिस के वकील ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने नेपाल के GenZ आंदोलन की तर्ज पर देश को बांटने वाले नारे लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने जानबूझकर ऐसी जगह प्रदर्शन किया, जहां विदेशी प्रतिनिधि और मीडिया भी मौजूद थे, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि प्रभावित होने का खतरा था। इसके अलावा पुलिस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान धक्कामुक्की हुई और कुछ पुलिसकर्मी हल्की चोटों के साथ घटनास्थल से बाहर आए।
यूथ कांग्रेस ने अदालत में जमानत याचिका दायर की। पार्टी ने दावा किया कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक अधिकार के तहत था। उनका कहना है कि युवाओं को सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है और प्रदर्शन का उद्देश्य केवल सरकार की नीतियों पर ध्यान आकर्षित करना था। पार्टी के अनुसार, यह एक सांकेतिक और राजनीतिक विरोध था, जिसे हिंसा या नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से नहीं किया गया।
बीजेपी ने इस घटना को देखते हुए देशभर में कांग्रेस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। दिल्ली में कांग्रेस कार्यालय के बाहर बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और सरकार पर देशविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रदर्शन युवा राजनीति में नए तरीकों और सोशल मीडिया के प्रभाव को उजागर करता है। नेपाल के GenZ आंदोलन से प्रेरित यह तरीका दर्शाता है कि युवा अब अपनी आवाज को सांकेतिक और प्रदर्शनात्मक रूप में सामने ला रहे हैं। हालांकि, पुलिस का मानना है कि इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है ताकि सार्वजनिक सुरक्षा और शांति बनी रहे।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि युवा राजनीतिक आंदोलनों में अधिक दृश्यात्मक और मीडिया-केंद्रित प्रदर्शन की ओर बढ़ रहे हैं। राजनीतिक दल इसे राजनीतिक संदेश और जन आंदोलन के रूप में पेश करते हैं, जबकि प्रशासन इसे सुरक्षा और कानून व्यवस्था की चुनौती मानता है। भारत मंडपम में हुए इस विरोध ने AI समिट और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी ध्यान आकर्षित किया, जिससे सरकार की नीतियों और युवा राजनीति पर बहस तेज हुई।
इस शर्टलेस प्रदर्शन ने युवा आंदोलन, सोशल मीडिया प्रभाव, और राजनीतिक रणनीति के बीच जटिल संबंध को उजागर किया है। इस मामले में अदालत और प्रशासन का निर्णय न केवल आरोपियों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि आने वाले समय में युवा आंदोलनों की रणनीति और उनके कानूनी दायरे पर भी असर डालेगा।