आंध्र प्रदेश में सोमवार तड़के एक बड़ा रेल हादसा सामने आया, जब टाटानगर–एर्नाकुलम एक्सप्रेस की दो एसी बोगियों में अचानक आग लग गई। इस घटना में एक यात्री की मौत हो गई, जबकि ट्रेन में सवार सैकड़ों यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दमकल की गाड़ियां पहुंचने से पहले ही दोनों कोच पूरी तरह जलकर खाक हो गए।
यह घटना विशाखापत्तनम से करीब 66 किलोमीटर दूर यलामंचिली इलाके के पास हुई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सोमवार रात करीब 12 बजकर 45 मिनट पर आग लगने की सूचना मिली। आग ट्रेन की बी1 और एम2 एसी कोच में लगी थी, जो पैंट्री कार के पास स्थित थे। शुरुआती जांच में आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है, हालांकि रेलवे और पुलिस दोनों ही मामले की जांच कर रहे हैं।
जिस समय आग लगी, उस वक्त बी1 कोच में 82 और एम2 कोच में 76 यात्री सवार थे। ट्रेन के लोको पायलट ने धुआं और आग की लपटें देखकर तुरंत ट्रेन को रोक दिया। इसके बाद यात्रियों ने किसी तरह अपनी जान बचाने के लिए कोच से बाहर निकलना शुरू किया। घना धुआं फैलने की वजह से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और मौके पर चीख-पुकार मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में आग ने दोनों कोचों को अपनी चपेट में ले लिया। यात्रियों ने बताया कि उन्हें अपना सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। आग लगने के बाद स्टेशन और आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया। रेलवे अधिकारियों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कराया।
दमकल विभाग की गाड़ियां पास के फायर स्टेशनों से मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक दोनों कोच पूरी तरह जल चुके थे। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। रेलवे प्रशासन ने मौके पर एंबुलेंस की व्यवस्था की और वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लेते रहे।
पुलिस ने बताया कि आग बुझने के बाद जब जले हुए कोचों की तलाशी ली गई, तो बी1 कोच के अंदर एक शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान 70 वर्षीय चंद्रशेखर सुंदर के रूप में हुई, जो आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के निवासी थे। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। आग की चपेट में आने से दोनों कोचों में मौजूद यात्रियों का सारा सामान जलकर नष्ट हो गया।
इस हादसे के चलते रेलवे यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। करीब 2,000 यात्री स्टेशन पर फंसे रह गए। विशाखापत्तनम–विजयवाड़ा रेल रूट पर चलने वाली कई ट्रेनों को रोक दिया गया या देरी से चलाया गया। यात्रियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा, जिससे उन्हें काफी परेशानी हुई।
रेलवे अधिकारियों ने जली हुई बोगियों को अलग करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद बाकी यात्रियों को सुरक्षित कोचों में शिफ्ट किया गया। आवश्यक तकनीकी जांच और व्यवस्था पूरी होने के बाद ट्रेन को आगे के सफर के लिए रवाना किया गया। हालांकि, कई यात्री इस घटना से गहरे सदमे में नजर आए।
रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि आग लगते ही ट्रेन को तुरंत रोक दिया गया था और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उन्होंने कहा कि रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस घटना की गहन जांच की जा रही है ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
इस हादसे के बाद रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि ट्रेनों में आग से बचाव के इंतजामों को और मजबूत किया जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में नियमित सुरक्षा जांच और आधुनिक फायर डिटेक्शन सिस्टम बेहद जरूरी है।
फिलहाल पुलिस और रेलवे की संयुक्त टीम घटना की जांच में जुटी हुई है। आग शॉर्ट सर्किट से लगी या किसी अन्य कारण से, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगी। वहीं, मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यलामंचिली के पास टाटानगर–एर्नाकुलम एक्सप्रेस में लगी आग ने एक बार फिर रेल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। इस हादसे में जहां एक बुजुर्ग यात्री की जान चली गई, वहीं सैकड़ों लोग बाल-बाल बच गए। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और रेलवे द्वारा उठाए जाने वाले आगे के कदमों पर टिकी हैं।