ब्रिटेन की राजधानी लंदन के टैविस्टॉक स्क्वायर में स्थित महात्मा गांधी की ऐतिहासिक प्रतिमा के साथ की गई तोड़फोड़ की घटना ने भारतीय समुदाय और सरकार को गहरा आघात पहुँचाया है। इस घटना की भारत सरकार के उच्चायोग ने कड़ी निंदा करते हुए इसे महात्मा गांधी की विचारधारा और अहिंसा के सिद्धांतों पर सीधा हमला बताया है।
अहिंसा दिवस से पहले हुई शर्मनाक हरकत
यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब विश्व भर में 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाना है। महात्मा गांधी, जिन्हें ‘अहिंसा के पुजारी’ के रूप में जाना जाता है, उनकी प्रतिमा को क्षति पहुँचाना न केवल एक मूर्ति को नुकसान पहुँचाना है, बल्कि उनके मूल्यों और वैश्विक विरासत पर भी हमला है।
भारतीय उच्चायोग ने जताई कड़ी आपत्ति
लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए स्थानीय प्रशासन से सख्त और त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जारी बयान में कहा- ‘यह कृत्य केवल एक स्मारक को नुकसान पहुँचाने की कोशिश नहीं है बल्कि गांधी जी की अहिंसक सोच और उनकी ऐतिहासिक विरासत को चुनौती देने की निंदनीय कोशिश है।’

मार्च 2025 में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यूनाइटेड किंगडम यात्रा के दौरान लंदन एक बार फिर से खालिस्तानी गतिविधियों का गवाह बना। उस समय विदेश मंत्री जब चैटम हाउस में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे बाहर खालिस्तान समर्थकों ने झंडे लहराकर और उग्र नारेबाज़ी करते हुए प्रदर्शन किया। भारत सरकार ने इस प्रदर्शन को लोकतंत्र की स्वतंत्रता का गलत उपयोग बताया और इसे अस्वीकार्य करार दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक कड़े बयान में कहा था कि, ‘भारत ऐसी उकसाने वाली गतिविधियों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगा। हम उम्मीद करते हैं कि मेज़बान देश अपने कूटनीतिक दायित्वों का पूरी तरह से पालन करेगा।’
इस तरह की घटनाएं केवल भारत की छवि पर असर नहीं डालतीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और गरिमा पर भी सवाल खड़ा करती हैं।