सोमवार को लद्दाख क्षेत्र में 5.7 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र उत्तर-पश्चिम कश्मीर के लेह जिले में था, जैसा कि नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) ने बताया।
NCS के अनुसार, भूकंप 11:51:14 बजे आया और इसका केंद्र लेह लद्दाख क्षेत्र में था, जिसकी गहराई 171 किलोमीटर थी।
भूकंप के प्रकार और खतरा
पारंपरिक रूप से, उथले भूकंप गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक खतरनाक माने जाते हैं क्योंकि सेस्मिक वेव्स को पृथ्वी की सतह तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी होती है, जिससे अधिक तेज़ कंपन और नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। इसके कारण, ऐसी घटनाओं में ज्यादा जनहानि और संपत्ति का नुकसान हो सकता है।
अफगानिस्तान में हालिया भूकंपों का इतिहास
इससे पहले अफगानिस्तान में भी कुछ दिन पहले कई भूकंप आए थे। 15 जनवरी को अफगानिस्तान में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी गहराई 96 किलोमीटर थी, जबकि 14 जनवरी को 3.8 तीव्रता का एक और भूकंप आया था, जिसकी गहराई 90 किलोमीटर थी, NCS के आंकड़ों के अनुसार।
सरकारी एडवाइजरी
लद्दाख में भूकंप के झटके महसूस होते ही सरकार ने स्थानीय प्रशासन को सतर्क कर दिया है। प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और खतरे से बचने के लिए उचित कदम उठाने की सलाह दी है।
इसके अलावा, लोगों से यह भी कहा गया है कि वे किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत अधिकारियों से संपर्क करें और भूकंप के बाद के संकट प्रबंधन में सहयोग करें।
भूकंप के कारण और भविष्य के जोखिम
लद्दाख क्षेत्र और उसके आसपास का इलाका भूकंपीय रूप से सक्रिय है, और यहां समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। यह क्षेत्र हिमालयी पर्वत श्रृंखला के पास स्थित है, जो लगातार भूगर्भीय गतिविधियों का केंद्र बना रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में भूकंपों का जोखिम हमेशा बना रहता है, और इसलिए यहां की इमारतों और इंफ्रास्ट्रक्चर को भूकंप के प्रति सुरक्षित बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं।
लद्दाख में आए इस भूकंप ने क्षेत्रीय नागरिकों और प्रशासन दोनों को सतर्क कर दिया है। इससे पता चलता है कि भूकंपों के प्रति जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होती है, ताकि जान-माल का नुकसान कम से कम किया जा सके।
सरकार और स्थानीय प्रशासन से उम्मीद की जाती है कि वे भविष्य में ऐसे घटनाओं के लिए बेहतर तैयारियां करेंगे, ताकि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा से निपटा जा सके।