भारतीय प्रतिभा का लोहा एक बार फिर दुनिया ने माना है। राजस्थान के एक छोटे से शहर से निकलकर अमेरिका के सिलिकॉन वैली में अपनी पहचान बनाने वाले ज्योति बंसल अब दुनिया के नए अरबपतियों की सूची में शामिल हो गए हैं। दो ‘बिलियन-डॉलर’ कंपनियां खड़ी करने वाले बंसल की कहानी न केवल सफलता की मिसाल है, बल्कि यह उन चुनौतियों को भी दर्शाती है जिनसे एक प्रवासी उद्यमी को गुजरना पड़ता है।
प्रारंभिक जीवन और प्रेरणा
ज्योति बंसल का जन्म राजस्थान में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद भारत के प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली से स्नातक (Graduation) किया। उनकी उद्यमिता की यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने बिल गेट्स की IIT कैंपस यात्रा और हॉटमेल (Hotmail) के सह-संस्थापक सबीर भाटिया की सफलता के बारे में सुना। इन दिग्गजों से प्रेरित होकर, मात्र 21 वर्ष की आयु में, कुछ सौ डॉलर लेकर वे कैलिफोर्निया चले गए।
H-1B वीजा की चुनौतियां और धैर्य
अमेरिका पहुंचने के बाद बंसल का सफर आसान नहीं था। वे सात साल तक एक इंजीनियर के रूप में विभिन्न टेक कंपनियों में काम करते रहे, जिन्होंने उनके H-1B वीजा को प्रायोजित (Sponsor) किया था। फोर्ब्स के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि H-1B वीजा की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस पर रहते हुए आप अपनी खुद की कंपनी शुरू नहीं कर सकते। उन्हें अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए तब तक इंतजार करना पड़ा जब तक उन्हें ‘ग्रीन कार्ड’ नहीं मिल गया। साल 2016 में वे आधिकारिक तौर पर अमेरिकी नागरिक बने।
दो बड़ी कंपनियों की सफलता: AppDynamics और Harness
ज्योति बंसल की पहली बड़ी सफलता AppDynamics थी। 2017 में उन्होंने इस कंपनी को सिस्को (Cisco) को भारी-भरकम राशि में बेच दिया था। इसके बाद उन्होंने Harness नाम की कंपनी की नींव रखी, जो एक AI-आधारित सॉफ्टवेयर डिलीवरी प्लेटफॉर्म है।
हाल ही में, ‘Harness’ ने गोल्डमैन सैक्स अल्टरनेटिव्स, इंस्टीट्यूशनल वेंचर पार्टनर्स और मेंलो वेंचर्स जैसे बड़े निवेशकों से 240 मिलियन डॉलर का फंड जुटाया है। इस निवेश ने कंपनी की वैल्यूएशन को आसमान पर पहुँचा दिया है।
नेट वर्थ और निवेश
फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, ज्योति बंसल की कुल संपत्ति (Net Worth) लगभग 2.3 बिलियन डॉलर (करीब 19,000 करोड़ रुपये से अधिक) आंकी गई है। उनकी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा ‘Harness’ में उनकी 30% हिस्सेदारी और ‘AppDynamics’ की बिक्री से प्राप्त नकदी से आता है।
रिटायरमेंट से वापसी: ‘कोडिंग के बाद का 70% काम‘
दिलचस्प बात यह है कि AppDynamics को बेचने के बाद बंसल ने रिटायर होने की कोशिश की थी। वे दुनिया की सैर पर निकले, लेकिन जल्द ही उन्हें अहसास हुआ कि गोल्फ खेलना या समुद्र किनारे बैठना उनका असली जुनून नहीं है। उन्होंने महसूस किया कि उन्हें कंपनियां बनाना ही सबसे ज्यादा पसंद है।
बंसल का मानना है कि सॉफ्टवेयर बनाना केवल 30% काम है। असली चुनौती बाकी के 70% हिस्से में है, जिसमें कोड की टेस्टिंग और उसे बिना किसी खराबी के चलाना शामिल है। ‘Harness’ इसी समस्या का समाधान करता है, ताकि सॉफ्टवेयर शिपिंग के दौरान कोई गड़बड़ी न हो।