केरल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने राज्य में भाजपा के प्रदर्शन को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि केरल की राजनीति में भाजपा का प्रभाव सीमित है और सरकार बनाने में उसकी कोई निर्णायक भूमिका नहीं दिखती। थरूर के मुताबिक, यदि भाजपा इस चुनाव में एक या दो सीटें भी जीत लेती है तो वही उसके लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि केरल में असली मुकाबला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) के बीच है। उनके अनुसार चुनाव त्रिकोणीय नहीं होगा, क्योंकि भाजपा अभी तक राज्य विधानसभा में कोई सीट नहीं जीत पाई है। इसलिए सत्ता की लड़ाई मुख्य रूप से इन दो गठबंधनों के बीच ही रहने वाली है।
थरूर ने यह भी कहा कि भाजपा का राज्य में वोट प्रतिशत बढ़ा जरूर है, लेकिन वह सीट जीतने के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने बताया कि पिछले 17 वर्षों में भाजपा का वोट शेयर लगभग 6 प्रतिशत से बढ़कर 12–13 प्रतिशत तक पहुंचा है। हालांकि लोकसभा चुनाव में पार्टी को करीब 19 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन विधानसभा चुनावों में यह आंकड़ा फिर घटकर 12–13 प्रतिशत के आसपास आ जाता है।
कांग्रेस नेता ने माना कि भाजपा धीरे-धीरे अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है और भविष्य में उसका आधार बढ़ सकता है, लेकिन फिलहाल सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन उसके पास नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में कांटे की टक्कर हो सकती है, इसलिए किसी भी पार्टी को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव 9 अप्रैल को प्रस्तावित है। पिछली बार 2021 के चुनाव में वाम मोर्चा ने 99 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी, जो राज्य के इतिहास में 1977 के बाद पहली बार हुआ था कि किसी गठबंधन ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। वहीं लोकसभा चुनाव में भाजपा को राज्य में एक सीट पर सफलता मिली थी, जब सुरेश गोपी त्रिशूर से जीतकर संसद पहुंचे थे।
थरूर के बयान ने चुनाव से पहले राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि भाजपा इस बार राज्य में अपनी मौजूदगी कितनी मजबूत कर पाती है।