भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन मजबूती दिखाई। प्रमुख आईटी कंपनियों जैसे Infosys, Tata Consultancy Services और HCL Technologies के शेयरों में 2% से लेकर 4% तक की बढ़त दर्ज की गई। यह तेजी ऐसे समय में आई है जब कुछ दिन पहले ही पूरे आईटी सेक्टर में भारी गिरावट देखने को मिली थी।
सुबह के शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों में खरीदारी साफ तौर पर नजर आई। Nifty IT इंडेक्स लगभग 0.88% चढ़कर 30,796 के स्तर पर पहुंच गया, जो व्यापक बाजार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। वहीं BSE Sensex और Nifty 50 में केवल हल्की बढ़त दर्ज हुई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार में तेजी सीमित रही और खास तौर पर आईटी सेक्टर में ही केंद्रित थी।
अगर प्रमुख शेयरों की बात करें, तो HCL Technologies में करीब 3.7% की तेजी देखी गई। TCS लगभग 3% तक चढ़ा, जबकि Infosys में 2% से ज्यादा की बढ़त दर्ज हुई। इसके अलावा अन्य आईटी कंपनियों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला, जिससे पूरे सेक्टर में रिकवरी का माहौल बना।
दरअसल, इस तेजी से पहले आईटी सेक्टर को एक बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा था। हफ्ते की शुरुआत में निवेशकों ने बड़े पैमाने पर आईटी शेयरों की बिकवाली की थी। इसकी मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती चिंताएं थीं। खासकर Anthropic के उस बयान ने बाजार को झटका दिया, जिसमें कहा गया था कि AI तकनीक लेगेसी सॉफ्टवेयर मॉडर्नाइजेशन जैसे कामों को ऑटोमेट कर सकती है। यह वही क्षेत्र है जिससे कई आईटी कंपनियों को बड़ा राजस्व मिलता है।
इस खबर के बाद निवेशकों को यह डर सताने लगा कि भविष्य में पारंपरिक आईटी सर्विस मॉडल कमजोर पड़ सकता है। इसी कारण आईटी शेयरों में तेज गिरावट आई और कई कंपनियों के वैल्यूएशन पर दबाव देखने को मिला।
हालांकि, पिछले दो दिनों में स्थिति कुछ सुधरी है। वैश्विक बाजारों, खासकर अमेरिका के टेक सेक्टर में मजबूती देखने को मिली है, जिसका असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी पड़ा। वॉल स्ट्रीट में टेक कंपनियों की बढ़त ने निवेशकों के भरोसे को फिर से मजबूत किया है। इसके अलावा India VIX में गिरावट आई है, जो बाजार में घटती अस्थिरता और जोखिम की भावना को दर्शाती है।
Anthropic की ओर से बाद में दिए गए स्पष्टीकरण ने भी बाजार को कुछ राहत दी। कंपनी ने संकेत दिया कि AI पूरी तरह से मौजूदा बिजनेस मॉडल को खत्म नहीं करेगा, बल्कि कंपनियों के साथ मिलकर काम करेगा। इससे निवेशकों की चिंता कुछ हद तक कम हुई और आईटी शेयरों में फिर से खरीदारी शुरू हुई।
फिर भी, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेजी को लेकर अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता। उनका कहना है कि फिलहाल जो बढ़त देखने को मिल रही है, वह मुख्य रूप से शॉर्ट कवरिंग और वैल्यू बाइंग का परिणाम है। विदेशी निवेशक अभी भी भारतीय आईटी सेक्टर में पूरी तरह सक्रिय नहीं हुए हैं और उनकी भागीदारी सीमित बनी हुई है।
आगे की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि आईटी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के साथ खुद को कैसे ढालती हैं। अगर कंपनियां नई तकनीक को अपनाकर अपने बिजनेस मॉडल को मजबूत बनाती हैं, तो सेक्टर में लंबी अवधि की मजबूती देखी जा सकती है।
आईटी सेक्टर में आई यह तेजी फिलहाल राहत जरूर दे रही है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। आने वाले समय में वैश्विक संकेत, AI से जुड़े विकास और कंपनियों की रणनीतियां इस सेक्टर की दिशा तय करेंगी।