भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO का PSLV-C62 रॉकेट, जिसमें 16 सैटेलाइट्स समेत एक विदेशी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट शामिल था, तीसरे चरण में तकनीकी समस्या का सामना करते हुए अपने मिशन में असफल हो गया। यह जानकारी सोमवार को अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष वी नारायणन ने दी।
नारायणन के अनुसार, रॉकेट के थ्रस्ट देने वाले स्ट्रैप-ऑन मोटर्स तीसरे चरण में काम कर रहे थे, लेकिन इसी दौरान रॉकेट में अस्थिरता देखी गई और बाद में यह निर्धारित उड़ान पथ से विचलित हो गया। उन्होंने कहा कि PSLV-C62 की इस त्रुटि की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है, ताकि समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सके।
क्या हुआ तीसरे चरण में?
नारायणन ने बताया कि PSLV एक चार-चरण वाला रॉकेट है, जिसमें दो ठोस ईंधन और दो तरल ईंधन वाले चरण शामिल हैं। मिशन के शुरुआती चरण पूरी तरह सफल रहे, लेकिन तीसरे चरण के अंत में रॉकेट में अस्थिरता बढ़ गई और अंततः उड़ान पथ से विचलन हुआ। इस कारण सभी 16 सैटेलाइट्स को नियत कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका।
यह PSLV का लगातार दूसरा मिशन फेलियर है। मई 2025 में PSLV-C61/EOS-09 मिशन भी इसी तरह सफल नहीं हो पाया था।
मिशन का उद्देश्य
PSLV-C62 मिशन का लक्ष्य था कि प्रधान अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट और सह-पैसेंजर सैटेलाइट्स को 512 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया जाए। रॉकेट 44.4 मीटर ऊंचा था और इसका उड़ान समय लगभग 17 मिनट तय किया गया था। लॉन्च सुबह 10:18 बजे निर्धारित समय पर हुआ।
मिशन के सैटेलाइट्स
इस मिशन में कुल 16 सैटेलाइट्स शामिल थे, जिनमें प्रमुख हैं:
- EOS-N1 (Anvesha) – भारत के रणनीतिक उपयोग के लिए अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (DRDO/NSIL)।
- AayulSAT – भारतीय स्टार्टअप OrbitAID का तकनीकी डेमो सैटेलाइट।
- MOI-1 – TakeMe2Space का AI और इमेजिंग CubeSat।
- LACHIT-1, Thybolt-3, CGUSat-1, DSUSat-1, SanskarSat, Munal, EduSat, UaiSat, Galaxy Explorer, Orbital Temple, Aldebaran-1, THEOS-2A, Kestrel Initial Demonstrator (KID)।
इनमें कुछ शैक्षणिक, कुछ तकनीकी प्रयोग और कुछ अंतरराष्ट्रीय सहयोग से बने सैटेलाइट्स शामिल थे।
आगे की कार्रवाई
नारायणन ने कहा कि मिशन कंट्रोल सेंटर और सभी ग्राउंड स्टेशनों से डेटा एकत्र किया जा रहा है, और इसके विश्लेषण के बाद ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि तीसरे चरण में अस्थिरता के कारण मिशन अपेक्षित परिणाम तक नहीं पहुँच सका।
PSLV-C62 मिशन की विफलता ISRO के लिए एक चुनौती है, लेकिन एजेंसी ने पहले भी तकनीकी समस्याओं से सीख लेकर भविष्य के मिशनों को सफल बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगली लॉन्च योजनाओं में सुधार और तकनीकी बदलाव किए जाएंगे, ताकि भारत के सैटेलाइट प्रोग्राम में कोई बाधा न आए।