इजराइल का ईरान के एटमी रिएक्टर पर हमला, कुछ घंटे पहले दी थी शहर खाली करने की चेतावनी, अब तक 600 से ज्यादा ईरानियों की मौत

ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि सरकार ने इजरायल में फंसे कुछ लोगों को जमीन के रास्ते निकाला है और दूसरे मौके तलाशे जा रहे हैं।

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इजराइल का ईरान के एटमी रिएक्टर पर हमला, कुछ घंटे पहले दी थी शहर खाली करने की चेतावनी, अब तक 600 से ज्यादा ईरानियों की मौत

तेल अवीव/तेहरान : इजराइल ने ईरान में अराक हेवी वॉटर रिएक्टर पर हमला कर दिया है। हमले के बाद हुए नुकसान की जानकारी नहीं मिली है। कुछ घंटे पहले ही इजराइली सेना (IDF) ने अराक और खोंडब शहर के लोगों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी थी।

अराक में हैवी वाटर रिएक्टर है। यह फैसिलिटी ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम का एक अहम हिस्सा है। इसके साथ ही अराक में बड़े पैमाने पर हथियारों का उत्पादन होता है।

इसके अलावा खोंडब में भी IR-40 हैवी वाटर रिएक्टर है, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम का एक और अहम हिस्सा है। यह फैसिलिटी अराक से करीब 40 किलोमीटर दूर है। अराक की तरह इसे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी में रखा जाता है।

ईरान और इजराइल के बीच जंग सातवें दिन में पहुंच गई है। अब तक इजराइल के 24 लोग मारे गए हैं। वहीं, वॉशिंगटन स्थित एक ह्यूमन राइट्स ग्रुप ने दावा किया है कि ईरान में मौत का आंकड़ा अब 639 हो चुका है और 1329 लोग घायल हुए हैं।

इजराइली हैकर्स ने बुधवार देर रात ईरान की सरकारी IRIB टीवी समेत कई न्यूज चैनल हैक कर लिए। इस दौरान लोगों से विद्रोह की अपील की गई। इन हैकर्स ने ईरान में साल 2022 में हुए विरोध प्रदर्शन वाले वीडियो चलाए, जिनमें महिलाएं अपने बाल काट रही हैं।

ईरान ने गुरुवार सुबह इजराइल में 4 जगहों पर मिसाइल गिराए हैं। इसमें बीर्शेबा शहर के सोरोका हॉस्पीटल को काफी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा ईरान ने तेल अवीव, रमत गान और होलोन पर भी हमला किया है। अभी नुकसान का पता नहीं चल पाया है।

ईरान के सरकारी टीवी ने बताया है कि इजराइल ने अराक में बने हेवी वॉटर रिएक्टर पर हमला किया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस हमले से कोई रेडिएशन (विकिरण) का खतरा नहीं है क्योंकि हमला होने से पहले ही यह जगह खाली करा ली गई थी।

इजराइल ने इस हमले की चेतावनी पहले ही दे दी थी और लोगों से उस इलाके को छोड़ने को कहा था। यह चेतावनी सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए दी गई थी, जिसमें रिएक्टर की सैटेलाइट इमेज भी दिखाई गई थी।

इजराइली सेना ने बताया कि उन्होंने गुरुवार को तेहरान और ईरान के अन्य इलाकों में हवाई हमले किए, लेकिन उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी।

इजराइल के इन हमलों में पहले ही नतांज यूरेनियम साइट, तेहरान के पास सेंट्रीफ्यूज बनाने वाली जगहों और इस्फहान में एक परमाणु ठिकाने को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में कई टॉप सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक मारे जा चुके हैं।

इजराइल में गुरुवार सुबह ईरानी बमबारी में कई लोग घायल हो गए हैं। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य और दक्षिणी इजराइल में कम से कम चार ईरानी मिसाइल गिरी हैं। फिलहाल नुकसान के बारे में पता लगाया जा रहा है।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने इजराइल और ईरान में फंसे अपने नागरिकों को निकालने की कोशिशें शुरू कर दी हैं, लेकिन बंद हवाई क्षेत्र के कारण उन्हें इसमें काफी दिक्कत आ रही है। ऑस्ट्रेलिया ने बताया कि करीब 1,500 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ईरान में हैं और मदद के लिए रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। वहीं, इजराइल में करीब 1,200 ऑस्ट्रेलियाई निकलना चाहते हैं।

ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि सरकार ने इजरायल में फंसे कुछ लोगों को जमीन के रास्ते निकाला है और दूसरे मौके तलाशे जा रहे हैं। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा कि उनका देश भी अपने नागरिकों की मदद के लिए पूरी कोशिश कर रहा है।

न्यूजीलैंड ने अपने तेहरान दूतावास को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और वहां तैनात दो कर्मचारियों और उनके परिवार को जमीन के रास्ते अजरबैजान भेज दिया गया है।

इंटरनेट निगरानी करने वाले संगठन नेट ब्लॉक्स ने बताया है कि ईरान में पिछले 12 घंटे से ज्यादा समय से इंटरनेट बंद है। ईरान की सरकार ने खुद इंटरनेट पर पाबंदी लगाने की बात मानी है। उसका कहना है कि इजराइली सेना देश में फैले इंटरनेट का गलत इस्तेमाल कर रही थी, इसलिए यह कदम उठाया गया है।

अमेरिका में ईरान का समर्थन करने वाले प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने न्यूयॉर्क शहर की सड़कों पर मार्च किया। वीडियो में देखा गया कि ये लोग टाइम्स स्क्वायर में “ईरान से दूर रहो” जैसे नारे लगा रहे थे और इजराइल समर्थकों पर नाराजगी जता रहे थे।

ये ईरानी समर्थक मैनहटन की सड़कों पर आगे बढ़ रहे थे, लेकिन न्यूयॉर्क पुलिस (NYPD) ने उन्हें इजराइली वाणिज्य दूतावास तक पहुंचने से रोक दिया। यह प्रदर्शन फिलिस्तीनी युवा आंदोलन और समाजवादी संगठनों पीपुल्स फोरम और ANSWER एलियांस ने मिलकर आयोजित किया था।

इजराइली सेना ईरान के टॉप-11 अफसरों को मारने में कामयाब हो गई है। उन्होंने इससे जुड़ा एक वीडियो भी जारी किया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया है कि ईरान अमेरिका से बातचीत करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची इजराइल के साथ जंग रोकने पर चर्चा करने के लिए जल्द ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात करेंगे। हालांकि, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई पहले अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत की संभावना को खारिज कर चुके हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिसमें पुतिन ने इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में मध्यस्थ बनने की बात कही थी। ट्रम्प ने कहा कि पुतिन को पहले यूक्रेन जंग को खत्म करना चाहिए।

व्हाइट हाउस में ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा, मैंने कल उनसे बात की थी। उन्होंने वास्तव में मध्यस्थता करने की पेशकश की, लेकिन मैंने उनसे कहा, पहले अपना ही मसला सुलझाओ।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका, ईरान पर इस सप्ताह के अंत में हमला कर सकता है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिका के कुछ बड़े अधिकारी ईरान पर हमले की प्लानिंग में जुटे हुए हैं।

एक सूत्र के मुताबिक, अमेरिका की कई बड़ी सरकारी एजेंसियों के अधिकारी पहले से ही इस तरह की सैन्य कार्रवाई की तैयारी में जुट गए हैं। सूत्र का यह भी कहना है कि यह प्लान अभी पूरी तरह तय नहीं हैं और इनमें बदलाव भी हो सकता है।

इजराइली सेना (IDF) ने ईरान के दो शहरों अराक और खोंडब के लोगों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी है। खोंडब शहर के पास एक हैवी वाटर न्यूक्लियर रिएक्टर है, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम का अहम हिस्सा माना जाता है।

IDF ने फारसी भाषा में बयान जारी कर बताया कि वे इस इलाके में ईरान की सैन्य गतिविधियों को निशाना बना रहे हैं। हैवी वाटर का इस्तेमाल रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए किया जाता है, लेकिन इससे प्लूटोनियम भी बनता है, जिसे परमाणु हथियारों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

2015 में ईरान ने एक परमाणु समझौते में ये वादा किया था कि वह इस रिएक्टर को इस तरह बदलेगा जिससे हथियार बनाने की संभावना कम हो। ब्रिटेन उस बदलाव में ईरान की मदद कर रहा था, लेकिन अमेरिका ने 2018 में इस समझौते से खुद को अलग कर लिया था।

2019 में ईरान ने रिएक्टर का एक हिस्सा शुरू किया था, जो उस समय समझौते का उल्लंघन नहीं माना गया। हालांकि, अब इस पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है।

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी IAEA ने बताया कि उसने 14 मई को आखिरी बार अराक की जांच की थी, लेकिन अब ईरान ने जांचकर्ताओं की पहुंच सीमित कर दी है, जिससे यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि ईरान इस समय कितना भारी पानी बना और जमा कर रहा है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को कहा कि इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म किया जा सकता है और इसका एक समाधान निकाला जा सकता है। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने इस तनाव को कम करने के लिए रूस की ओर से मदद की पेशकश भी की है।

पुतिन ने कहा कि रूस एक ऐसा समझौता करवाने में मदद करना चाहता है, जिससे ईरान को शांतिपूर्ण तरीके से अपना परमाणु कार्यक्रम चलाने दिया जाए और साथ ही इजराइल की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का भी ध्यान रखा जाए।

पुतिन ने यह बात दुनिया की बड़ी समाचार एजेंसियों के संपादकों के साथ हुई एक चर्चा में कही। उन्होंने बताया कि रूस ने इस प्रस्ताव को ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ साझा भी किया है।

इजराइल में 75% लोगों ने जंग का समर्थन किया है। जबकि 17% लोग इसका विरोध कर रहे हैं। 64% लोगों का मानना है कि नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल खतरे को रोकने के लिए युद्ध शुरू किया, लेकिन 28% को लगता है कि उन्होंने यह कदम घरेलू राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए उठाया।

ईरान के साथ जंग शुरू होने का इजराइली पीएम नेतन्याहू को फायदा मिला है। चैनल 13 न्यूज के सर्वे के मुताबिक अगर इजराइल में अभी चुनाव होते हैं तो नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिल सकती हैं। यह पिछले हफ्ते की तुलना में 3 ज्यादा है।

हालांकि, नेतन्याहू का गठबंधन फिर भी संसद में बहुमत हासिल करने से दूर रहेगा। क्योंकि उनके गठबंधन को सिर्फ 50 सीटें मिलती दिख रही हैं। जबकि बहुमत हासिल करने के लिए 61 सीटें चाहिए।

वहीं, सर्वे में पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की पार्टी की सीटें घट गई हैं। पिछले सप्ताह उन्हें 27 सीटें मिल रही थीं, यह अब 24 रह गई हैं। चैनल 13 ने यह नहीं बताया कि सर्वे में कितने लोगों से सवाल पूछे गए थे।

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