अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर जनरल माइकल ‘एरिक’ कुरिल्ला ने एक बेहद अहम और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा है कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल हमला करने की क्षमता में 90 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह उपलब्धि अमेरिकी वायुसेना के सबसे घातक और उन्नत विमान B-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर्स की सटीक और विध्वंसकारी कार्रवाई का नतीजा बताई जा रही है।
जनरल कुरिल्ला का बड़ा बयान
एक हाई-प्रोफाइल प्रेस ब्रीफिंग में जनरल कुरिल्ला ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “हमने ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को बुरी तरह कमजोर कर दिया है। B-2 बॉम्बर्स ने इतने सटीक और प्रभावी हमले किए हैं कि ईरान के मिसाइल अटैक्स में 90 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।” उनका यह बयान इस संघर्ष में अमेरिकी सैन्य रणनीति की सफलता को दर्शाता है और यह संकेत देता है कि अमेरिका ने ईरान की आक्रामक क्षमताओं को जड़ से कमजोर करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है।
B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स: अमेरिका का सबसे घातक हथियार
B-2 स्पिरिट बॉम्बर दुनिया का सबसे उन्नत और दुर्लभ स्टेल्थ विमान है। यह रडार की पकड़ में नहीं आता और दुश्मन को भनक लगे बिना गहरे लक्ष्यों पर सटीक वार करने में सक्षम है। इन विमानों ने ईरान के अंडरग्राउंड यानी जमीन के नीचे दबे हुए बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर्स पर दर्जनों 2,000 पाउंड (लगभग 907 किलोग्राम) वजनी भारी बम गिराए। ये बम इतने शक्तिशाली होते हैं कि जमीन के कई मीटर नीचे तक बने बंकरों और सुरंगों को भी नष्ट कर सकते हैं।
ईरान ने अपनी मिसाइल प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए वर्षों से भारी निवेश किया था। उसने दक्षिणी और मध्य इलाकों में गहरी भूमिगत सुरंगें और मजबूत बंकर बनाए थे, जहां मिसाइलें और उनके लॉन्चर छुपाए गए थे। यह रणनीति ईरान की सुरक्षा का एक अहम हिस्सा थी। लेकिन अमेरिकी B-2 बॉम्बर्स ने इन्हीं छुपे हुए ठिकानों को निशाना बनाया और एक-एक करके उन्हें तबाह कर दिया।
अंडरग्राउंड लॉन्च साइट्स को बनाया निशाना
जनरल कुरिल्ला ने बताया कि CENTCOM की यह कार्रवाई ईरान के दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में फोकस्ड थी। इन इलाकों में ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता का एक बड़ा हिस्सा छुपा रखा था। अंडरग्राउंड टनल्स के जरिए मिसाइलों को जमीन के नीचे सुरक्षित स्थान पर रखा जाता था और जरूरत पड़ने पर उन्हें लॉन्च किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क को अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने पहले चिन्हित किया और फिर B-2 बॉम्बर्स ने उन पर सटीक बमबारी कर उन्हें नाकाम कर दिया।
ईरानी ‘ड्रोन कैरियर शिप’ पर भी बड़ा हमला
इस पूरे ऑपरेशन में सिर्फ जमीनी ठिकाने ही नहीं, बल्कि समुद्री ताकत को भी निशाना बनाया गया। CENTCOM ने जानकारी दी कि ईरान का एक ‘ड्रोन कैरियर शिप’ जो संभवतः इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना का जहाज था अभी भी आग में जल रहा है। यह जहाज ड्रोन लॉन्च करने के लिए उपयोग किया जाता था और ईरान की नौसैनिक आक्रामकता का एक अहम हिस्सा था।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह जहाज फारस की खाड़ी में मौजूद था, जब उस पर अमेरिकी या इजरायली हमला किया गया। हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई। क्रू मेंबर्स को आग लगने से पहले या उसके दौरान सुरक्षित निकाल लिया गया, हालांकि इस संबंध में विस्तृत जानकारी अभी सीमित है। जहाज का नाम और सटीक स्थान आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यह घटनाक्रम उस व्यापक संघर्ष का हिस्सा है जो अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तेज होता जा रहा है। अमेरिका की रणनीति स्पष्ट रूप से ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने पर केंद्रित है चाहे वो जमीनी मिसाइल ठिकाने हों, समुद्री संपत्तियां हों या ड्रोन नेटवर्क। B-2 बॉम्बर्स की सफलता यह दर्शाती है कि अमेरिका इस संघर्ष में बेहद आक्रामक और तकनीकी रूप से श्रेष्ठ रणनीति अपना रहा है।
ईरान के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है क्योंकि बैलिस्टिक मिसाइलें उसकी रक्षा रणनीति की रीढ़ मानी जाती थीं। अब जबकि उन क्षमताओं में 90% की गिरावट आने का दावा किया जा रहा है, तो यह ईरान की सामरिक स्थिति के लिए एक बड़ा झटका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरान इस स्थिति पर कैसे प्रतिक्रिया देता है और यह संघर्ष किस दिशा में जाता है।