ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ एक गंभीर चेतावनी जारी की है। बुधवार को ईरान की सरकारी टीवी पर एक संदेश प्रसारित किया गया, जिसमें ट्रंप के 2024 में हुई असफल हत्या के प्रयास की फुटेज दिखाई गई और कहा गया कि “इस बार गोली निशाना नहीं चूक पाएगी।” इस धमकी को ईरान की ओर से ट्रंप के लिए अब तक की सबसे स्पष्ट और गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।
टेलीविजन पर दिखाई गई वीडियो में ट्रंप को 13 जुलाई 2024 के बटलर, पेनिल्वेनिया रैली के दौरान गोली लगने के बाद खून से सना हुआ और घायल दिखाया गया। उस हमले में गोली ट्रंप के कान को छूकर निकल गई थी, और वह गंभीर रूप से घायल नहीं हुए थे। इस बार ईरान ने स्पष्ट संदेश दिया कि अगर हमला दोबारा हुआ, तो परिणाम गंभीर होंगे।
ईरान में प्रदर्शन और हालात
ईरान में विरोध प्रदर्शन दिसंबर 2025 से जारी हैं। देश की मुद्रा रियाल गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई, महंगाई बढ़ी और जीवन यापन मुश्किल हो गया। आर्थिक नाराजगी से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल गया है और राजनीतिक बदलाव की मांग में बदल गया है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक हजारों लोग इन प्रदर्शनों में मारे जा चुके हैं और कई घायल या गिरफ्तार हुए हैं।
ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए इंटरनेट और फोन नेटवर्क कई क्षेत्रों में बंद कर दिए हैं, जिससे संवाद और जानकारी जुटाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में विदेशों में रहने वाले लोग और विशेषकर अमेरिकी अधिकारी ईरान में हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
ट्रंप और उनके प्रशासन ने ईरान की कार्रवाई पर चिंता जताई है। ट्रंप ने कई बार कहा है कि अगर ईरान सरकार प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक कार्रवाई करती है, तो अमेरिका “कड़ी प्रतिक्रिया” कर सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी प्रशासन ईरानी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप का यह रुख ईरान में प्रदर्शनकारियों के लिए समर्थन का संकेत है, और अमेरिका क्षेत्र में संभावित सैन्य कदमों के लिए तैयारी कर रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने मध्य पूर्व में अपने सैनिकों की स्थिति पर ध्यान दिया है, और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति का सामना करने के लिए रणनीतियाँ बनाई जा रही हैं।
ईरान और अमेरिका के पहले के तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच यह तनाव नया नहीं है। 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के क़ुद्स फोर्स के प्रमुख जनरल क़ासिम सोलैमानी की हत्या के बाद से दोनों देशों के बीच प्रतिशोध और धमकियों का सिलसिला जारी है। उस हमले के बाद ईरान ने अमेरिका और ट्रंप के खिलाफ प्रतिशोध की चेतावनी दी थी।
2021 में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खमनेई ने भी ट्रंप के खिलाफ चेतावनी जारी की थी। 2022 में अमेरिका ने ईरानी क्रांतिकारी गार्ड के एक सदस्य पर ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पर हमला करने की योजना बनाने का आरोप लगाया। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव लंबे समय से बना हुआ है और दोहराया जा सकता है।
ट्रंप और ईरान की रणनीति
ट्रंप ने अपने सलाहकारों को निर्देश दिया था कि अगर उनका जीवन खतरे में आया तो वे ईरान के खिलाफ “भारी कार्रवाई” करेंगे। इस बार ईरान की टीवी चेतावनी ने ट्रंप के लिए सीधे खतरे की स्थिति बना दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल संदेश देने का तरीका भी हो सकता है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक कहते हैं कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच यह तनाव बढ़ता है, तो न सिर्फ दोनों देशों के संबंध प्रभावित होंगे, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर असर पड़ेगा। किसी भी अप्रत्याशित सैन्य या राजनीतिक कदम से वैश्विक बाजार, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
भविष्य की चुनौतियाँ
अब यह देखने वाली बात यह है कि क्या यह धमकी केवल चेतावनी है या इसके पीछे कोई वास्तविक योजना है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने और कूटनीतिक समाधान खोजने का आग्रह किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सबसे जरूरी है शांतिपूर्ण बातचीत और किसी भी अप्रत्याशित सैन्य कार्रवाई से बचना।
ईरान और अमेरिका के बीच यह तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। ट्रंप के लिए यह स्थिति व्यक्तिगत सुरक्षा की चुनौती भी है और राष्ट्रीय सुरक्षा के स्तर पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है।