बदला भारत का वर्कप्लेस! अब सैलरी में भी महिलाएं दे रही हैं पुरुषों को बराबरी की टक्कर

Vin News Network
Vin News Network
4 Min Read
महिलाएं भी अब सैलरी और परफॉर्मेंस में दे रही हैं पुरुषों को कड़ी टक्कर

नई ग्लोबल रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए है भारत में अब पुरुषों और महिलाओं के वेतन में अंतर तेजी से घट रहा है। कंपनियां अब जेंडर नही बल्कि कौशल, अनुभव और परफॉर्मेंस को आधार बना रही हैं। यह भारत के वर्कप्लेस में एक बड़े और सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

सैलरी में जेंडर गैप हुआ कम
भारत में रोजगार और सैलरी पैटर्न को लेकर जारी एक ताज़ा ग्लोबल रिपोर्ट ने बड़ा बदलाव दिखाया है।लंबे समय से यह धारणा रही कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कम सैलरी मिलती है, लेकिन अब यह अंतर तेजी से घट गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है जहां पुरुष और महिला कर्मचारियों के बीच वेतन का अंतर काफी कम है।यह देश के रोजगार बाजार और कॉर्पोरेट वर्क कल्चर में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

रिपोर्ट में क्या कहा गया?
ग्लोबल वर्कफोर्स मैनेजमेंट कंपनी Deal द्वारा जारी इस रिपोर्ट में 150 देशों के 10 लाख से अधिक कॉन्ट्रैक्ट्स और 35,000 कंपनियों का डेटा शामिल किया गया।इसका उद्देश्य दुनियाभर में रोजगार और सैलरी के बदलते ट्रेंड्स को समझना था। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पुरुष और महिला कर्मचारियों की औसत वार्षिक सैलरी 13,000 डॉलर से 23,000 डॉलर (करीब ₹10 लाख से ₹19 लाख) के बीच है। यह समानता दिखाती है कि अब कंपनियां जेंडर के बजाय योग्यता और परफॉर्मेंस पर फोकस कर रही हैं।

टेक सेक्टर में दिखी गिरावट
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारत में इंजीनियरिंग, डेटा और टेक्नोलॉजी सेक्टर में सैलरी में गिरावट दर्ज की गई है।2024 में जहां इन पेशेवरों की औसत सैलरी 36,000 डॉलर थी, वहीं 2025 में यह घटकर 22,000 डॉलर रह गई।यह गिरावट ग्लोबल टेक सेक्टर में आई मंदी और कंपनियों द्वारा लागत नियंत्रण नीतियों का परिणाम मानी जा रही है। इसके बावजूद वर्कप्लेस में जेंडर इक्विटी की दिशा में भारत की प्रगति को रिपोर्ट ने सराहा है।

हाइब्रिड वर्क मॉडल ने बढ़ाई लचीलापन
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत में हाइब्रिड वर्क मॉडल अब स्थिर हो चुका है।लगभग 60-70% कर्मचारी फुल-टाइम, जबकि 30-40% कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट या फ्रीलांस आधार पर काम कर रहे हैं।कंपनियां अब लचीले कार्य ढांचे को अपनाने में अधिक सहज हो गई हैं। Deal के एशिया-पैसिफिक रीजन के जनरल मैनेजर मार्क सैमलाल ने कहा कि यह बदलाव समाज और कॉर्पोरेट दोनों के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।

दुनियाभर में सैलरी ट्रेंड्स
वैश्विक स्तर पर अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा औसत वेतन के मामले में शीर्ष देशों में हैं।AI, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल मार्केटिंग जैसे हाई-डिमांड सेक्टर्स में कर्मचारियों को 20-25% तक अधिक वेतन मिल रहा है। इन क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों की कमी के कारण कंपनियां बेहतर वेतन और ESOPs (कंपनी शेयर) जैसी सुविधाएं दे रही हैं।भारत और ब्राज़ील जैसे उभरते बाजारों में यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

भारत सबसे तेज़ी से घटा रहा है जेंडर पे गैप
रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है भारत उन देशों में शामिल है जो जेंडर पे गैप को सबसे तेज़ी से कम कर रहे हैं। यह न सिर्फ कॉर्पोरेट बदलाव का संकेत है बल्कि समाज में महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भूमिका का प्रमाण भी है।कंपनियों की पारदर्शिता, योग्यता आधारित सिस्टम और समान अवसर देने की सोच इस परिवर्तन को और मज़बूती दे रही है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *