‘पैक्स सिलिका अलायंस’ में भारत की एंट्री: टेक्नोलॉजी की दुनिया में नया पावर गेम

Vin News Network
Vin News Network
4 Min Read
पैक्स सिलिका अलायंस में शामिल होकर भारत ने टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़ी छलांग लगाई।

भारत ने वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका अलायंस’ में आधिकारिक रूप से शामिल हो गया है। शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को इस महत्वपूर्ण घोषणा ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। इस मौके पर Sergio Gor और Ashwini Vaishnaw की मौजूदगी ने इस साझेदारी को और भी अहम बना दिया।

यह गठबंधन सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाने के उद्देश्य से बनाया गया है। अमेरिका ने इसकी शुरुआत दिसंबर 2025 में की थी, और अब भारत का इसमें शामिल होना इसे और अधिक प्रभावशाली बनाता है।

‘Pax Silica’ का मतलब और महत्व
‘Pax Silica’ नाम अपने आप में इस गठबंधन का उद्देश्य स्पष्ट करता है। ‘Pax’ का अर्थ है शांति और स्थिरता, जबकि ‘Silica’ सिलिकॉन को दर्शाता है—जो आधुनिक कंप्यूटर चिप्स का मूल आधार है।

इसका सीधा मतलब है कि यह पहल तकनीकी स्थिरता, सुरक्षित सप्लाई चेन और भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बनाई गई है। कोविड-19 महामारी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बाद यह महसूस किया गया कि चिप्स और टेक्नोलॉजी के लिए कुछ ही देशों पर निर्भर रहना जोखिम भरा है।

चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति
हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल China पर तकनीकी निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में चीन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में ‘पैक्स सिलिका अलायंस’ सहयोगी देशों के बीच एक भरोसेमंद नेटवर्क तैयार करने का प्रयास है, जिससे महत्वपूर्ण संसाधनों की सप्लाई किसी एक देश पर निर्भर न रहे।

यह पहल अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति और टेक्नोलॉजी-आधारित साझेदारी मॉडल का हिस्सा मानी जा रही है।

किन देशों की है भागीदारी
इस गठबंधन में पहले से कई प्रमुख देश शामिल हैं, जिनमें United States, Japan, South Korea, Australia, Singapore, Israel, United Kingdom, Qatar और United Arab Emirates जैसे देश शामिल हैं।

ये सभी देश टेक्नोलॉजी, चिप मैन्युफैक्चरिंग, AI रिसर्च और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। भारत के शामिल होने से यह समूह और ज्यादा मजबूत हो गया है।

भारत के लिए क्यों है बड़ा मौका
भारत तेजी से उभरती डिजिटल इकोनॉमी और टेक्नोलॉजी हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इस गठबंधन में शामिल होने से भारत को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण है—सेमीकंडक्टर मिशन को गति मिलना। भारत पहले ही चिप निर्माण और डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां लागू कर चुका है। इस साझेदारी से तकनीकी सहयोग, विदेशी निवेश और रिसर्च साझेदारी के नए रास्ते खुलेंगे।

इसके अलावा, AI सेक्टर और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी बड़ा लाभ मिल सकता है। वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत होगी और देश तकनीकी उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है।

क्या भारत बन सकता है नया टेक किंग?
पैक्स सिलिका अलायंस में शामिल होना भारत के लिए सिर्फ एक साझेदारी नहीं, बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी नेतृत्व की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अगर भारत इस अवसर का सही तरीके से उपयोग करता है, तो आने वाले वर्षों में वह सेमीकंडक्टर, AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बन सकता है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *