भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है और आने वाले वर्षों में यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आज वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और अपनी आर्थिक मजबूती के दम पर स्थिर प्रगति कर रहा है।
उन्होंने बताया कि 2014 में भारत 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था लेकिन पिछले एक दशक में वह पांचवें स्थान पर पहुंच चुका है और जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने की दिशा में अग्रसर है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह प्रगति केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर लोगों के जीवन पर भी स्पष्ट रूप से दिखता है अब तक 2.5 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन-स्तर जैसे कारकों को शामिल किया गया है।
सीतारमण ने देश के बैंकिंग सेक्टर की सुधार यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट अब पहले से कहीं अधिक मजबूत है और वे दोहरी बहीखाता (ट्विन बैलेंस शीट प्रॉब्लम) जैसी चुनौतियों से उबर चुके हैं। पहले जहां कंपनियों का भारी कर्ज बैंकों के एनपीए बढ़ा रहा था अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और बैंक आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
वित्त मंत्री ने साथ ही यह भरोसा भी जताया कि सरकार वित्तीय अनुशासन पर कायम रहेगी और चालू वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटे को 4.4% तक सीमित करने के लक्ष्य को पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि भारत की यह आर्थिक प्रगति केवल विकास दर का संकेत नहीं, बल्कि एक आत्मनिर्भर, स्थिर और समावेशी अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रतीक है।