भारत और दक्षिण अफ़्रीका के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच का चौथा दिन पूरी तरह रोमांच, संघर्ष और दबाव से भरा रहा। दक्षिण अफ़्रीका की दूसरी पारी में ट्रिस्टन स्टब्स की शानदार 94 रनों की पारी ने मुकाबले को एकतरफा बनाते हुए मेजबान टीम को ऐसी स्थिति में पहुँचा दिया जहाँ वे मैच के पूर्ण नियंत्रण में नज़र आए। स्टब्स ने जिस तरह संयम और आक्रामकता का संतुलन साधा, उसने दक्षिण अफ़्रीका को भारत के सामने 549 रनों का विशाल लक्ष्य रखने में निर्णायक भूमिका निभाई।
स्टब्स ने साधा भारतीय गेंदबाज़ों पर नियंत्रण
दूसरी पारी में दक्षिण अफ़्रीका शुरू से ही तेज खेल दिखाना चाहता था, लेकिन शुरुआती विकेट गिरने के बाद टीम को एक स्थिर साझेदारी की ज़रूरत थी। ऐसे में ट्रिस्टन स्टब्स ने क्रीज़ पर कब्ज़ा जमाया। उन्होंने भारतीय गेंदबाज़ों की हर चाल को धैर्य से पढ़ते हुए रन बनाए। यह पारी केवल रन जोड़ने की नहीं, बल्कि परिस्थितियों को अपने हक में मोड़ने की थी। 94 रन भले सेंचुरी से छह कदम दूर रहे, लेकिन उनकी पारी ने मैच की दिशा ही बदल दी।
स्टब्स ने तेज गेंदबाज़ों के खिलाफ जमकर पुल और कट शॉट खेले, जबकि स्पिनरों को स्वीप और लॉफ्टेड ड्राइव से निशाना बनाया। उनकी पारी में धैर्य और साहस का संतुलन दिखा, जिसने भारतीय गेंदबाज़ों पर लगातार दबाव बनाए रखा।
भारत पर पड़ा मानसिक दबाव
549 रनों का लक्ष्य टेस्ट क्रिकेट में बहुत कम ही टीमों ने हासिल किया है। भारत के सामने चुनौती सिर्फ इतनी नहीं कि उन्हें बड़ा स्कोर करना है, बल्कि समय, पिच की हालत और गेंदबाज़ों की थकावट—ये तीनों पहलू भी अब बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं। चौथे दिन की समाप्ति पर भारतीय पारी शुरू हुई, जिसमें केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल को यह जिम्मेदारी मिली कि वे दिन के शेष ओवर सावधानी से निकालें और टीम को स्थिर शुरुआत दिलाएँ।
स्टेडियम में माहौल ऐसा था जैसे हर गेंद एक नई परीक्षा हो। दक्षिण अफ़्रीका के गेंदबाज़, खासकर नई गेंद लेकर, पूरी मजबूती से दूसरे छोर पर खड़े थे। उनके इरादे साफ थे—भारत को शुरुआती झटका देकर मुकाबले को आख़िरी दिन से पहले ही अपने पक्ष में झुका देना।
जायसवाल और राहुल की परीक्षा
यशस्वी जायसवाल, जो अपने आक्रामक खेल के लिए जाने जाते हैं, शुरुआत में थोड़े संयमित दिखाई दिए। उन्होंने डिफेंस को प्राथमिकता देते हुए गेंद को समझने की कोशिश की। दूसरी ओर केएल राहुल अपनी अनुभवी शैली में खेल रहे थे—कम जोखिम, अधिक ध्यान और विकेट पर टिकने का लक्ष्य।
भारतीय टीम मैनेजमेंट की सबसे बड़ी उम्मीद यही थी कि यह जोड़ी बिना विकेट खोए दिन समाप्त करे, ताकि आख़िरी दिन टीम तनावमुक्त होकर बल्लेबाज़ी शुरू कर सके। हालाँकि यह मिशन आसान नहीं था, क्योंकि दक्षिण अफ़्रीका की गेंदबाज़ी में रफ्तार, उछाल और चतुराई तीनों भरपूर मौजूद थीं।
पिच की भूमिका अब निर्णायक
चौथे दिन के अंत तक पिच पर दरारें बढ़ने लगी थीं और गेंद अनियमित उछाल भी दिखा रही थी। स्पिनरों को टर्न मिल रहा था और तेज गेंदबाज़ों को पिच से अतिरिक्त उछाल। ऐसे में अगले दिन बल्लेबाज़ी करना आसान नहीं होगा। भारत के लिए यह सिर्फ बल्लेबाज़ी नहीं बल्कि धैर्य, एकाग्रता और मानसिक मजबूती की सबसे कठिन परीक्षा होने वाली है।
आख़िरी दिन क्या उम्मीद?
भारतीय टीम के सामने दो रास्ते हैं या तो इस लक्ष्य का पीछा करते हुए क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा चमत्कार कर डाले, या फिर लंबे समय तक बल्लेबाज़ी करते हुए मैच को बचाने का प्रयास करे। लक्ष्य असंभव नहीं तो बेहद कठिन ज़रूर है। दक्षिण अफ़्रीका की योजना जल्दी विकेट निकाल कर भारत को दबाव में धकेलना।
जो भी हो, पाँचवें दिन का खेल इस श्रृंखला की दिशा तय करेगा और क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह दिन तनाव, रोमांच और अनिश्चितता से भरा रहने वाला है।