लंदन। भारत और इंग्लैंड के बीच चल रही टेस्ट सीरीज़ के दौरान क्राउली और गिल के बिच मचे विवाद पर पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने विवादित बयान दिया है। वॉन का कहना हैं कि भारत को इस रणनीति से कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि क्रिकेट में यह कोई नया हथकंडा नहीं है।
वॉन ने कहा, “अगर क्राउली ने खेल में थोड़ा समय बर्बाद किया है, तो भारत को इससे शिकायत नहीं करनी चाहिए। भारतीय टीम खुद भी समय प्रबंधन के मामले में कम पीछे नहीं रही है। टेस्ट क्रिकेट में माइंड गेम्स और रणनीति का अहम रोल होता है।”
पूर्व कप्तान ने यह भी जोड़ा कि भारत खुद कई बार ऐसी स्थितियों में खेल की रफ्तार को धीमा करता रहा है, चाहे वह गेंदबाज़ी में हो या फील्ड प्लेसमेंट में। ऐसे में ओपनर की रणनीति पर सवाल उठाना थोड़ा एकतरफा होगा।
ज्ञात हो कि भारत के 387 रन पर आउट होने के बाद मेहमान टीम के पास तीसरे दिन के अंतिम सत्र में दो ओवर फेंकने का पर्याप्त समय था लेकिन क्राउली के चोट का बहाना बनाने और जसप्रीत बुमराह के शुरुआती ओवर के दौरान तीन बार गेंद खेलने से पीछे हट जाने की रणनीति के कारण देरी हुई। भारत को इससे सिर्फ एक ओवर फेंकने का मौका मिला जिससे मेहमान टीम नाराज हो गई क्योंकि इंग्लैंड ने तीसरे दिन अपनी दूसरी पारी में बिना किसी नुकसान के दो रन बनाए।

हालांकि, वॉन ने इंग्लैंड की ‘बैज़बॉल’ रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि, “टीम का फोकस मैच जीतने पर है, और अगर इसके लिए कुछ अलग रणनीति अपनाई जाती है तो वह खेल का हिस्सा है। भारत को भी यह समझना चाहिए।”
इंग्लैंड के एक अन्य पूर्व कप्तान एलिस्टर कुक ने कहा कि 1-1 से बराबरी पर चल रही इस सीरीज में रोमांच लाने के लिए ऐसे ही ड्रामा की जरूरत थी। कुक ने कहा, ‘सभी बहुत दोस्ताना रहे हैं लेकिन पांच मैच की सीरीज में ऐसा हमेशा होता है। एक-दूसरे के खिलाफ कई बार खेलने के बाद कुछ छोटे-छोटे पल आते हैं।’
क्रिकेट जगत में यह बयान अब नई बहस को जन्म दे सकता है कि आखिर समय खींचना खेल भावना के तहत आता है या नहीं। लेकिन माइकल वॉन का यह तर्क स्पष्ट करता है कि इंग्लैंड अपनी रणनीति को लेकर पूरी तरह सहज है।