भारत 2030 तक ‘उच्च-मध्यम-आय’ वाले देश के रूप में उभरने की दिशा में, दो वर्षों में ₹375 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनने की संभावना: SBI रिसर्च

Vin News Network
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SBI रिसर्च रिपोर्ट में भारत की आर्थिक विकास यात्रा और 2030 तक उच्च-मध्यम-आय वाले देशों की श्रेणी में शामिल होने का अनुमान

भारत अब 2030 तक एक उच्च-मध्यम-आय वाले देश बनने की दिशा में मजबूती से बढ़ रहा है और 2028 तक यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, जैसा कि SBI रिसर्च की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है। इस रिपोर्ट में भारत की पिछले एक दशक में तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर ध्यान आकर्षित किया गया है, जो इसे 2024 तक वैश्विक विकास वितरण में 95वें प्रतिशत में रखता है।

SBI रिसर्च का अनुमान है कि भारत आने वाले दो वर्षों में ₹375 लाख करोड़की अर्थव्यवस्था का आंकड़ा पार कर लेगा।

भारत का आर्थिक विकास: एक संक्षिप्त इतिहास

भारत ने 2007 में निम्न-आय से मध्य-आय वाले देश की श्रेणी में कदम रखा था, और इसके बाद देश की प्रति व्यक्ति GNI (सकल राष्ट्रीय आय) 1962 में ₹6,750 से बढ़कर 2007 में ₹68,250 हो गई। इस अवधि में भारत का वार्षिक विकास दर 5.3% रहा। इसके बाद, भारत ने 60 वर्षों में ₹75,00,000 करोड़ की अर्थव्यवस्था तक पहुंचने का मील का पत्थर हासिल किया। इसके सात साल बाद, 2014 में ₹1,50,00,000 करोड़ की अर्थव्यवस्था और फिर सात साल बाद 2021 में ₹2,25,00,000 करोड़ की अर्थव्यवस्था बन गई। 2025 तक यह ₹3,00,00,000 करोड़ की अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है और यह 2026 तक ₹3,75,00,000 करोड़ की अर्थव्यवस्था को पार कर सकता है।

भारत की प्रति व्यक्ति आय का आंकड़ा 2009 में ₹75,000 तक पहुंच गया था, और 2019 में ₹1,50,000 तक बढ़ गया। 2026 तक, प्रति व्यक्ति आय ₹2,25,000 तक पहुंचने का अनुमान है और 2030 तक यह ₹3,00,000 तक पहुंच सकता है, जब भारत एक उच्च-मध्यम-आय वाले देश के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करेगा। इस समय तक भारत चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ समान वर्गीकरण में होगा।

उच्च-आय वाले देशों में भारत का प्रवेश

रिपोर्ट के अनुसार, भारत को यदि 2047 तक उच्च-आय वाले देशों में शामिल होना है, तो इसके प्रति व्यक्ति GNI में सालाना औसत वृद्धि दर 7.5% होनी चाहिए। SBI रिसर्च के मुताबिक, भारत के प्रति व्यक्ति GNI में पिछले 23 वर्षों (2001-2024) में औसतन 8.3% की वृद्धि हुई है, जो कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मददगार हो सकती है।

अगर उच्च-आय श्रेणी का परिभाषित सीमा $13,936 प्रति व्यक्ति GNI बनी रहती है, तो 2047 तक भारत इस सीमा को पार कर सकता है। हालांकि, यह सीमा बढ़ सकती है और अगर यह ₹13,50,000 ( तक पहुंचती है, तो भारत को इसे प्राप्त करने के लिए प्रति व्यक्ति GNI में लगभग 8.9% की वृद्धि करने की आवश्यकता होगी।

वैश्विक विकास की दिशा में भारत की स्थिति

भारत का विकास पिछले दशक में वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय रूप से तेज़ हुआ है। यह रिपोर्ट इस बात को रेखांकित करती है कि भारत का स्थान 25 साल की अवधि में 92वें प्रतिशत से बढ़कर 95वें प्रतिशत में पहुंच गया है। इसका मतलब यह है कि भारत के विकास की गति ने दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है और भारत अब वैश्विक विकास वितरण के ऊपरी हिस्से में शामिल है।

SBI रिसर्च के अनुसार, अगर भारत का प्रति व्यक्ति GNI वर्तमान उच्च-आय मानक के अनुसार ₹10,45,200 तक पहुंचता है, तो भारत 2047 तक इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 7.5% की वार्षिक वृद्धि कर सकता है। यह दर अब तक की दर से अधिक है और 23 सालों में निरंतर वृद्धि की संभावना है।

वैश्विक आर्थिक विकास में अन्य देशों का योगदान

SBI रिसर्च ने 1990 में 48 निम्न- और मध्य-आय वाले देशों का विश्लेषण किया, जिन्होंने समय के साथ उच्च-आय वाले देशों में अपनी स्थिति को उन्नत किया। इस सूची में गयाना सबसे प्रमुख उदाहरण है, जिसने 1990 से 2024 के बीच अपनी प्रति व्यक्ति GNI को ₹29,250 से बढ़ाकर ₹15,10,500 तक पहुंचाया। इसी तरह चीन और इंडोनेशिया ने भी अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूती से उन्नत किया है।

चीन, जिसने 1990 में ₹24,750 प्रति व्यक्ति GNI के साथ निम्न-आय वाले देशों में अपनी पहचान बनाई थी, अब 2024 तक उच्च-मध्यम-आय वाले देशों में शुमार किया जा चुका है। इसी तरह इंडोनेशिया ने भी इसी अवधि में अपनी स्थिति में सुधार किया है और अब वह भी उच्च-मध्यम-आय वाले देशों में शामिल है।

2047 तक उच्च-आय वाले देशों में भारत का प्रवेश

SBI रिसर्च का कहना है कि यदि भारत को 2047 तक उच्च-आय वाले देशों में शामिल होना है, तो उसे अपने प्रति व्यक्ति GNI को औसतन 7.5% की दर से बढ़ाना होगा। अगर वर्तमान दर की तुलना में उच्च-आय श्रेणी की सीमा बढ़कर ₹13,50,000 तक पहुंच जाती है, तो भारत को इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगभग 8.9% की वार्षिक वृद्धि की आवश्यकता होगी।

इसके लिए जरूरी होगा कि भारत अपनी आर्थिक नीतियों में संरचनात्मक सुधार जारी रखे, जैसे कि श्रम सुधार, निवेश में वृद्धि, और नौकरी सृजन। साथ ही वैश्विक व्यापार समझौतों और स्वदेशी उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

भारत का वैश्विक आर्थिक संदर्भ में स्थान

भारत के आर्थिक विकास का विश्लेषण वैश्विक संदर्भ में किया जाए तो यह स्पष्ट होता है कि 1990 में दुनिया के 218 देशों में से 51 देशों को निम्न-आय वाले देशों में शामिल किया गया था, जबकि 2024 तक केवल 26 देशों को निम्न-आय वाले देशों में वर्गीकृत किया जाएगा। इसके मुकाबले, उच्च-आय वाले देशों की संख्या 39 से बढ़कर 87 हो जाएगी।

भारत 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में है। यह तेजी से बढ़ते हुए भारतीय बाजार और देश में सुधारों के कारण संभव हो रहा है। सरकार द्वारा जारी किए गए विभिन्न नीतिगत सुधार, जैसे GST और Make in India, भारत को दुनिया की प्रमुख शक्तियों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं।

भारत के आर्थिक विकास के इस तेज़ रफ्तार के परिणामस्वरूप, देश आने वाले वर्षों में उच्च-मध्यम-आय वाले देशों की श्रेणी में शुमार हो जाएगा। 2030 तक भारत ₹3,00,000 प्रति व्यक्ति GNI तक पहुंचने की दिशा में अग्रसर है, जो उसे उच्च-मध्यम-आय वाले देशों की श्रेणी में स्थापित करेगा।

इसके साथ ही, सरकार की विकसित भारत (Viksit Bharat) योजना के तहत, 2047 तक भारत को उच्च-आय वाले देशों में शामिल किया जा सकेगा। लेकिन इसके लिए लगातार विकास दर को बनाए रखना होगा, जो भारत की आर्थिक नीति और वैश्विक सुधारों पर निर्भर करेगा।

भारत की आर्थिक यात्रा अब एक नया मुकाम हासिल करने की ओर बढ़ रही है और यह देश को भविष्य में एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की ओर अग्रसर करेगा।

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