इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के उद्घाटन दिवस पर दुनियाभर के नीति-निर्माता, बहुपक्षीय संस्थाएं, टेक्नोलॉजी लीडर, स्टार्टअप, उद्योग प्रतिनिधि और नवाचार विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे। पहले दिन की चर्चाओं में यह स्पष्ट हुआ कि वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम में भारत की भूमिका तेजी से केंद्रीय होती जा रही है। सत्रों में सिद्धांत से आगे बढ़कर ठोस संस्थागत ढांचा, बुनियादी ढांचा निर्माण और रणनीतिक रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया गया। प्रमुख विषयों में जिम्मेदार शासन एवं संप्रभुता, AI आधारित आर्थिक परिवर्तन, सिद्धांत से क्रियान्वयन और स्किलिंग व इकोसिस्टम निर्माण शामिल रहे।
कार्यक्रम में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी तथा वाणिज्य-उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत केवल अपने लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए AI समाधान विकसित करेगा और ग्लोबल साउथ के देशों के विकास में भी योगदान देगा। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णा ने बताया कि सरकार ने निजी क्षेत्र को डेटा सेंटर और AI कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया है। सरकार सीधे सब्सिडी देने के बजाय AI कंप्यूट तक सस्ती पहुंच उपलब्ध करा रही है, जिससे शोधकर्ता, स्टार्टअप और छात्र कम लागत पर तकनीक का उपयोग कर सकें।
समिट का प्रमुख आकर्षण “इंडिया AI इम्पैक्ट बिल्डाथॉन” रहा, जो AI को लोकतांत्रिक बनाने की देशव्यापी पहल है। 21 शहरों में आयोजित 48 प्री-समिट कार्यशालाओं में 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया, जबकि राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन में 100 शहरों से 40 हजार प्रतिभागी जुड़े। इनमें से 850 प्रतिभागियों की 200 टीमों ने फाइनल चरण में जगह बनाई और शीर्ष 6 टीमों ने वित्तीय और डिजिटल धोखाधड़ी रोकने से जुड़े AI समाधान प्रस्तुत किए।
इंडियाAI मिशन के सीईओ और अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि भारत की असली ताकत युवा नवप्रवर्तकों में है जो बड़े स्तर पर जीवन बदलने वाले समाधान बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे आधार और यूपीआई ने शासन और भुगतान प्रणाली को बदल दिया है तथा समिट के लिए विदेशी प्रतिनिधियों को भी यूपीआई उपयोग की अनुमति दी गई ताकि वे निर्बाध डिजिटल भुगतान का अनुभव कर सकें।
“ट्रस्टवर्दी AI” सत्र में विशेषज्ञों ने नवाचार और नियमन के संतुलन, पारदर्शिता, जवाबदेही और मानव निगरानी पर चर्चा की। “ओपन सोर्स AI” सत्र में डिजिटल संप्रभुता को केवल मॉडल के स्वामित्व तक सीमित न मानकर पूरे AI स्टैक हार्डवेयर, डेटा, गवर्नेंस और ऑडिट प्रणाली तक विस्तारित करने पर जोर दिया गया। वहीं “वर्कफोर्स ट्रांसफॉर्मेशन” चर्चा में रोजगार बाजार, कौशल पोर्टेबिलिटी और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई गई।
ओपन डेटा पर हुए सत्र में AI-रेडी डेटा सेट, इंटरऑपरेबल मानकों और सांख्यिकी संस्थानों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया ताकि सार्वजनिक डेटा AI नवाचार का मजबूत आधार बन सके। समिट के पहले दिन की चर्चाओं ने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं बल्कि जिम्मेदार, समावेशी और आर्थिक रूप से परिवर्तनकारी AI समाधान बनाने वाला वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।