बैंकॉक/तेहरान: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप होने के बीच थाईलैंड ने एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल की है। थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल ने शनिवार (28 मार्च 2026) को घोषणा की कि तेहरान के साथ हुए एक विशेष समझौते के तहत अब थाई तेल जहाजों को इस रणनीतिक मार्ग से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
थाईलैंड की ऊर्जा चिंताएं और समझौता
थाईलैंड अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में मध्य पूर्व के तेल आयात पर निर्भर है। प्रधानमंत्री अनुतिन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “इस समझौते से देश में ईंधन आपूर्ति को लेकर बनी चिंताएं कम होंगी। अब हमारे तेल टैंकर बिना किसी डर के हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर सकेंगे।” गौरतलब है कि युद्ध शुरू होने के बाद से इस मार्ग से होने वाले व्यापार में 95% तक की गिरावट आई है, जिससे थाईलैंड के पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही थीं।
‘मयूरी नारी’ पर हमले के बाद बढ़ा तनाव
यह समझौता इस महीने की शुरुआत में हुई एक हिंसक घटना के बाद आया है। 11 मार्च को थाईलैंड के ध्वज वाले कार्गो जहाज ‘मयूरी नारी’ (Mayuree Naree) पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हमला हुआ था। इस हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी और 20 चालक दल के सदस्यों को ओमान की नौसेना ने बचा लिया था, लेकिन 3 सदस्य अब भी लापता हैं। यह जहाज यूएई से भारत के कांडला बंदरगाह जा रहा था।
क्षेत्रीय स्थिति: युद्ध का बढ़ता दायरा
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह केवल उन देशों के जहाजों को रास्ता देगा जो उसके ‘दुश्मनों’ (अमेरिका और इजरायल) से सीधे तौर पर नहीं जुड़े हैं। थाईलैंड से पहले भारत, चीन और रूस जैसे देशों ने भी अपने जहाजों के लिए इसी तरह के सुरक्षा आश्वासन प्राप्त किए हैं। इस बीच, आज सुबह ही इजरायल ने तेहरान में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर है।