महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों हनीट्रैप और फोन टैपिंग के आरोपों को लेकर गर्मा गई है। शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक रोहित पवार ने एक बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि राज्य सरकार के कुछ मंत्री इस कदर आशंकित हैं कि उन्होंने अपने मोबाइल फोन ही बंद कर दिए हैं। रोहित पवार का आरोप है कि इन मंत्रियों को शक है कि उनके फोन टैप किए जा रहे हैं।
रोहित पवार ने कहा— “महाराष्ट्र सरकार के कुछ मंत्रियों को जासूसी का डर सता रहा है। उन्हें शक है कि उनकी निजी बातचीत और गोपनीय जानकारी रिकॉर्ड की जा रही है। इसी वजह से कुछ लोगों ने अपने फोन बंद कर दिए हैं।”
इन गंभीर आरोपों पर राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा— “अगर किसी के पास ऐसे किसी आरोप के सबूत हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए। बिना प्रमाण के इस तरह के बयान केवल राजनीति को गंदा करने का काम करते हैं।”
इस विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। हनीट्रैप और फोन टैपिंग जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्ष इसे सरकार की विफलता बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि यह सिर्फ ध्यान भटकाने की रणनीति है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर फोन टैपिंग के आरोप सच साबित होते हैं, तो यह गंभीर संवैधानिक और कानूनी संकट पैदा कर सकता है। यह मामला अब राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर जांच एजेंसियों तक पहुंच सकता है।