देश के करोड़ों किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card – KCC) योजना को और प्रभावी बनाने की दिशा में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अहम कदम उठाने का ऐलान किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी है कि किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़ी नई और समेकित गाइडलाइंस जल्द जारी की जाएंगी। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य किसानों को कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए ऋण की आसान, पारदर्शी और व्यापक सुविधा उपलब्ध कराना है।
आरबीआई के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों से न केवल किसानों बल्कि खेती से जुड़े श्रमिकों और संबद्ध गतिविधियों में लगे लोगों को भी लाभ मिलेगा।
KCC गाइडलाइंस में क्या होंगे प्रमुख बदलाव
आरबीआई ने बताया कि खेती और उससे संबंधित गतिविधियों के लिए जारी विभिन्न निर्देशों को एक साथ लाकर अपडेट किया जाएगा। इसके तहत किसान क्रेडिट कार्ड की संरचना को अधिक सरल और व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रस्तावित प्रमुख बदलावों में शामिल हैं:
फसल मौसम (Crop Season) को मानकीकृत करना
किसान क्रेडिट कार्ड की वैधता अवधि को बढ़ाकर 6 वर्ष तक करना
प्रत्येक फसल चक्र के लिए तय वित्तीय पैमाने के अनुरूप ड्राइंग लिमिट को जोड़ना
खेती में तकनीक से जुड़े खर्चों को भी KCC के तहत कवर करने की अनुमति देना
आरबीआई का मानना है कि इन बदलावों से किसानों को हर फसल चक्र के दौरान वित्तीय योजना बनाने में सुविधा मिलेगी।
क्या है किसान क्रेडिट कार्ड योजना
किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत किसानों को सस्ती दरों पर और बिना जटिल प्रक्रिया के ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत किसान अपनी अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि जरूरतों, फसल कटाई के बाद के खर्च, खेती से जुड़ी गतिविधियों और घरेलू आवश्यकताओं के लिए बैंक से आसानी से लोन ले सकते हैं।
यह योजना केंद्र सरकार और आरबीआई की प्राथमिक योजनाओं में शामिल रही है, जिसका मकसद किसानों की निर्भरता गैर-औपचारिक उधार स्रोतों पर कम करना है।
KCC के तहत कितना मिलता है लोन और ब्याज दर
किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card – KCC) से जुड़ी नई गाइडलाइन लाने की तैयारी कर रहा है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि इन नए नियमों का मकसद किसानों को खेती और उससे जुड़ी जरूरतों के लिए लोन लेना और आसान बनाना है।
RBI के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े अलग-अलग नियमों को अब एक साथ लाकर अपडेट किया जाएगा। इससे किसानों को योजना को समझने और उसका लाभ लेने में सहूलियत होगी। इन बदलावों से किसान ही नहीं, बल्कि खेती से जुड़े मजदूरों और अन्य गतिविधियों में लगे लोगों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
नई गाइडलाइन में फसल के मौसम को मानकीकृत करने का प्रस्ताव है, ताकि हर किसान को एक समान व्यवस्था का लाभ मिल सके। इसके साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड की अवधि को बढ़ाकर 6 साल तक करने की योजना है, जिससे बार-बार कार्ड रिन्यू कराने की जरूरत न पड़े।
RBI ड्राइंग लिमिट को भी हर फसल चक्र के हिसाब से तय करने पर काम कर रहा है। इसका मतलब है कि किसान को अपनी फसल की जरूरत के अनुसार लोन मिल सकेगा। इसके अलावा खेती में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीक और उपकरणों पर होने वाले खर्च को भी KCC के तहत शामिल करने की तैयारी है।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत किसानों को सस्ती ब्याज दर पर आसानी से लोन उपलब्ध कराने के लिए की गई थी। इस योजना के जरिए किसान अपनी खेती, फसल कटाई के बाद के खर्च, घरेलू जरूरतों और खेती से जुड़ी गतिविधियों के लिए बैंक से लोन ले सकते हैं।
संशोधित ब्याज अनुदान योजना (MISS) के तहत किसानों को फसल और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए शॉर्ट-टर्म कृषि लोन दिया जाता है। इस योजना में 5 लाख रुपये तक के लोन पर 7 प्रतिशत की ब्याज दर लागू होती है।
अगर किसान समय पर लोन चुका देते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त 3 प्रतिशत की ब्याज छूट मिलती है। इस तरह प्रभावी ब्याज दर घटकर 4 प्रतिशत रह जाती है। छोटे किसानों को फसल कटाई के बाद वेयरहाउस रसीद (NWR) के आधार पर भी लोन की सुविधा मिलती है।
किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ कई तरह के किसान उठा सकते हैं। इसमें मालिक किसान, किराएदार किसान, मौखिक पट्टेदार, बटाईदार किसान, स्वयं सहायता समूह (SHG) और संयुक्त देयता समूह (JLG) शामिल हैं।
KCC के तहत किसानों को RuPay ATM कार्ड भी दिया जाता है, जिससे वे जरूरत के समय आसानी से पैसे निकाल सकते हैं। इस योजना में फसल के बाद के खर्च, फसल की मार्केटिंग, घरेलू जरूरतें और खेती के उपकरणों के रखरखाव के लिए वर्किंग कैपिटल की सुविधा मिलती है।
इसके अलावा पशुपालन, डेयरी, मछली पालन और खेती से जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए भी निवेश ऋण दिया जाता है। किसान क्रेडिट कार्ड योजना देशभर में कमर्शियल बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक और सहकारी बैंकों के माध्यम से लागू की जाती है।