गाजियाबाद की बारिश एक बार फिर शहर की व्यवस्था की पोल खोल गई है। लेकिन इस बार नुकसान सिर्फ आम आदमी तक सीमित नहीं रहा। वसुंधरा के निवासी किशोर नाम के व्यक्ति ने दावा किया है कि भारी बारिश के चलते उनकी Mercedes-Benz GLA 200D जलभराव में फंसकर खराब हो गई।
घटना का विवरण
किशोर ने बताया कि 23 जुलाई को वे अपनी लग्ज़री कार से लाजपत नगर जा रहे थे। जैसे ही वे श्याम पार्क एक्सटेंशन के पास पहुंचे, उन्हें सड़क पर गहरा जलभराव दिखाई दिया। उन्होंने प्रयास किया कि कार पार करा ली जाए, लेकिन अचानक इंजन बंद हो गया और गाड़ी पानी में फंस गई।
कार की हालत और नुकसान
किशोर के मुताबिक, यह कार उन्होंने 2018 में लगभग ₹60 लाख में खरीदी थी। बारिश और जलभराव के चलते गाड़ी को तुरंत नोएडा स्थित एक Mercedes सर्विस सेंटर में टो कराना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि अब गाड़ी की हालत बेहद खराब है और मरम्मत का खर्च लाखों रुपये तक जा सकता है।
कानूनी कार्रवाई का रुख
किशोर ने नगर निगम पर नालियों की सफाई और जल निकासी की लापरवाही का आरोप लगाते हुए ₹5 लाख मुआवजे का नोटिस भेजा है। उनका कहना है कि नगर निगम ने समय रहते उचित इंतजाम नहीं किए, जिसकी वजह से उन्हें यह भारी नुकसान उठाना पड़ा। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो वे हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करेंगे।
नगर निगम का जवाब
नगर आयुक्त विक्रमादित्य मलिक ने मीडिया को बताया कि कार मालिक को ये साबित करना होगा कि गाड़ी की खराबी और जलभराव का सीधा संबंध है। उन्होंने यह भी कहा कि उस दिन उसी मार्ग से कई अन्य गाड़ियां भी गुजरीं, लेकिन किसी और से ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली। मलिक ने यह भी जोड़ा कि मौसम विभाग द्वारा पहले से ही भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी, और लोगों को सतर्क रहने को कहा गया था। ऐसे में यह निजी असावधानी भी हो सकती है।
किशोर की प्रतिक्रिया
किशोर का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक गाड़ी की खराबी तक सीमित नहीं है। यह प्रशासनिक लापरवाही का एक उदाहरण है, जो किसी के भी साथ हो सकता है। “मैं ये मुद्दा उठाकर यह बताना चाहता हूं कि जनता के टैक्स से चलने वाले सिस्टम की जवाबदेही भी होनी चाहिए,” उन्होंने कहा।
प्रभाव और बहस
इस घटना ने शहरी जल प्रबंधन की खामियों को फिर उजागर किया है। गाजियाबाद जैसे बड़े शहर में, जहां लग्ज़री गाड़ियां सड़कों पर दिखना आम है, वहां बुनियादी सुविधाओं की यह स्थिति हैरान करने वाली है। अगर यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंचता है, तो यह सिस्टम की जवाबदेही तय करने का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।
लोगों की राय और सोशल मीडिया प्रतिक्रिया घटना के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने गाजियाबाद नगर निगम की खुली आलोचना की। कई लोगों ने लिखा —
- “ये तो Mercedes थी, अगर कोई एम्बुलेंस फंसती तो?”
- “सिर्फ पोस्टर नहीं, सड़क भी ठीक करो”
- “जब टैक्स देते हैं, तो सुविधा क्यों नहीं?”