गार्डनिंग के शौकीनों के लिए पौधों को फंगस और कीटों से बचाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। बाजार में मिलने वाले महंगे केमिकल फंगीसाइड न सिर्फ जेब पर भारी पड़ते हैं, बल्कि नाजुक पौधों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। अब फार्मिंग एक्सपर्ट नरेंद्र सिंह राणा ने एक ऐसा देसी जुगाड़ शेयर किया है जो पूरी तरह मुफ्त, जैविक और बेहद असरदार है। इसके लिए आपको चाहिए बस रसोई में रखी पुरानी खट्टी लस्सी और घर का तांबे का लोटा।
क्यों काम करता है यह देसी फंगीसाइड
इस नुस्खे की असली ताकत दो चीजों के मेल में है। पहली है खट्टी लस्सी, जिसमें मौजूद लैक्टिक एसिड पौधों के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। दूसरा है तांबा, जो अपने एंटी-फंगल गुणों के लिए सदियों से जाना जाता है। जब ये दोनों आपस में मिलते हैं तो एक रासायनिक प्रतिक्रिया होती है जिससे प्राकृतिक रूप से कॉपर सल्फेट जैसा तत्व बनता है, जो बाजार के महंगे फंगीसाइड जितना ही प्रभावी होता है।
कैसे बनाएं यह घोल — पूरी विधि
पहला कदम — सही लस्सी का चुनाव करें
सबसे पहले ध्यान रखें कि लस्सी जितनी पुरानी और खट्टी होगी, घोल उतना ही ज्यादा असरदार बनेगा। ताजी लस्सी की बजाय कम से कम 3-4 दिन पुरानी, और हो सके तो 15 दिन पुरानी खट्टी लस्सी लें। एक प्लास्टिक की बाल्टी लें और उसमें यह खट्टी लस्सी डाल दें।
दूसरा कदम — तांबे का लोटा डालें
यह पूरी प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा है। लस्सी वाली बाल्टी में तांबे का लोटा या कोई भी तांबे का बर्तन डाल दें। अगर तांबे का लोटा नहीं है तो तांबे के तार या छोटे टुकड़े भी काम आएंगे। तांबा और खट्टी लस्सी जब आपस में मिलते हैं तो एक प्राकृतिक रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है।
तीसरा कदम — 10 दिन प्रतीक्षा करें
बाल्टी को अच्छी तरह ढक्कन से बंद करें और किसी छायादार व ठंडी जगह पर 10 दिनों के लिए छोड़ दें। इन 10 दिनों में तांबा लस्सी के साथ रिएक्ट करता रहेगा। धीरे-धीरे लस्सी का रंग हल्का हरा या नीला होने लगेगा, जो इस बात का संकेत है कि आपका फंगीसाइड तैयार हो रहा है। बीच में इसे हिलाने की कोई जरूरत नहीं है।
चौथा कदम — घोल तैयार करें और छानें
10 दिन पूरे होने के बाद बाल्टी से तांबे का लोटा बाहर निकालें। आप देखेंगे कि लोटा पूरी तरह काला या गहरा हरा हो चुका होगा, जो यह दर्शाता है कि तांबे के तत्व लस्सी में घुल चुके हैं। अब इस गाढ़े घोल को लकड़ी से अच्छी तरह मिलाएं। स्प्रे करने से पहले घोल को महीन कपड़े या छलनी से जरूर छान लें ताकि लस्सी के मोटे कण स्प्रे पंप की नोजल में न फंसें।
कैसे करें इस्तेमाल
तैयार घोल को स्प्रे बोतल में भरकर पौधों की पत्तियों पर, खासतौर पर पत्तियों की निचली सतह पर, छिड़काव करें। सुबह या शाम के समय छिड़काव करना सबसे बेहतर रहता है। यह घोल फंगस, फफूंद और कई तरह के कीटों से पौधों को बचाने में कारगर साबित होता है।