बांग्लादेश में हिंसा के बाद भारत में उबाल, दिल्ली से कोलकाता तक प्रदर्शन; द्विपक्षीय रिश्तों में बढ़ा तनाव

Vin News Network
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बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या के विरोध में दिल्ली और कोलकाता में प्रदर्शन

बांग्लादेश में हालिया हिंसा और एक हिंदू नागरिक की हत्या के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव और गहरा गया है। मंगलवार दोपहर विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल सहित कई हिंदू संगठनों ने नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के मयमनसिंह में मारे गए दिपु चंद्र दास को न्याय दिलाने की मांग की।

इसी तरह के विरोध प्रदर्शन कोलकाता में भी देखने को मिले, जहां हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश के उप उच्चायोग तक मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस बढ़ते विरोध और हिंसा की घटनाओं के बीच भारत-बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों पर असर साफ नजर आने लगा है।

बांग्लादेश में हिंसा की शुरुआत कैसे हुई?

बांग्लादेश में हिंसा की ताजा लहर पिछले सप्ताह उस समय शुरू हुई, जब शरीफ उस्मान हादी, जो छात्र नेता और पिछले साल जुलाई में शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे, की मौत हो गई। हादी को ढाका में गोली मारी गई थी और बाद में इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

उनकी मौत के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जो धीरे-धीरे व्यापक अशांति में बदल गए।

मीडिया संस्थानों पर हमले

हिंसा के दौरान बांग्लादेश के दो प्रमुख मीडिया संस्थानों—द डेली स्टार और प्रथम आलो—के दफ्तरों पर हमला किया गया। उपद्रवियों ने इन कार्यालयों में तोड़फोड़ की और आगजनी की। कुछ पत्रकार घंटों तक इमारतों के अंदर फंसे रहे, जिन्हें बाद में सुरक्षा बलों ने बाहर निकाला।

मीडिया पर हुए इन हमलों ने देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मयमनसिंह में हिंदू व्यक्ति की हत्या से मचा बवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मयमनसिंह में एक हिंदू परिधान फैक्ट्री कर्मचारी दिपु चंद्र दास की हत्या ने हालात को और गंभीर बना दिया। आरोप है कि दास को कथित रूप से ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीटा, फैक्ट्री से बाहर घसीटा और फिर आग के हवाले कर दिया।

हालांकि बाद में सामने आई रिपोर्टों में कहा गया कि दास पर लगाए गए आरोप अस्पष्ट थे और ईशनिंदा का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। इस घटना ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर भारी नाराजगी पैदा कर दी।

हिंसा जारी, एक और नेता को गोली

बांग्लादेश में अशांति अभी थमी नहीं है। सोमवार को खुलना में एक और नेता मोहम्मद मोतालेब सिकदर को गोली मार दी गई। स्थानीय मीडिया के मुताबिक गोली उनके सिर को छूते हुए निकल गई और फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

इस घटना के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।

भारत में विरोध प्रदर्शन तेज

दिपु चंद्र दास की हत्या के बाद भारत के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। कोलकाता में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों ने भविष्य में सीमा बंद करने जैसे आंदोलन की चेतावनी दी।

इसके अलावा त्रिपुरा में बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग के बाहर भी प्रदर्शन हुए, जिनमें टिपरा मोथा पार्टी और अन्य संगठनों ने हिस्सा लिया।

बांग्लादेश ने वीज़ा सेवाएं कीं निलंबित

भारत में अपने राजनयिक मिशनों के बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए नई दिल्ली स्थित उच्चायोग और त्रिपुरा व सिलीगुड़ी के मिशनों में वीज़ा सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं।

यह फैसला दोनों देशों के नागरिकों और यात्रियों के लिए असुविधा का कारण बन सकता है।

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

भारत ने मयमनसिंह में हिंदू नागरिक की हत्या की कड़ी निंदा की है और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इसी क्रम में भारत सरकार ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह को तलब किया।

यह कदम कथित तौर पर नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता हसनत अब्दुल्ला के उस बयान के बाद उठाया गया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि बांग्लादेश भारत विरोधी अलगाववादी ताकतों को शरण दे सकता है।

संयुक्त राष्ट्र की चिंता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी बांग्लादेश में जारी हिंसा और हिंदू व्यक्ति की हत्या की निंदा की है। यूएन प्रवक्ता ने कहा कि हर देश में अल्पसंख्यकों को सुरक्षित महसूस करना चाहिए और ऐसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं।

सुरक्षा व्यवस्था सख्त

बढ़ती हिंसा को देखते हुए बांग्लादेश में कम से कम 20 नेताओं और मीडिया कर्मियों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इनमें प्रमुख अखबारों के संपादक भी शामिल हैं।

बांग्लादेश में जारी हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हमले और मीडिया संस्थानों को निशाना बनाए जाने से हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं। इसका असर अब भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी साफ दिखने लगा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की कूटनीतिक पहल और सुरक्षा कदम इस तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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