पंजाब के अमृतसर जिले के सीमांत ब्लॉक रमदास का साहूवाल गांव इन दिनों रावी दरिया में आई बाढ़ की मार झेल रहा है। लगभग 356 लोगों की आबादी वाले इस गांव में हर घर, खेत और रास्ता पानी में डूबा हुआ है। चार-चार फीट तक भरा पानी लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर चुका है। ग्रामीण कई दिनों से पानी के बीच ही रहने को मजबूर हैं। इससे न केवल उनका दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है बल्कि बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ गया है।
गांव के हालात इस बात की गवाही देते हैं कि आपदा केवल प्राकृतिक नहीं होती, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को भी जन्म देती है। यहां के लोग बाढ़ की समस्या से लगातार जूझ रहे हैं, लेकिन असली लड़ाई अब आजीविका बहाली, स्वास्थ्य और पुनर्निर्माण की है।
दयनीय हालात
साहूवाल गांव के जसपाल सिंह, हरदीप सिंह, मंगा सिंह और हरजिंदर ने बताया कि पानी का स्तर कुछ कम हुआ है, लेकिन बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। गांव में बुखार और अन्य संक्रामक रोगों के मामले बढ़ रहे हैं। प्रशासन की टीमों ने मेडिकल किटें बांटी हैं लेकिन जांच और इलाज की पूरी सुविधा न होने से लोग अब भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
पशुओं पर आफत
साहूवाल के लोग अपने मवेशियों की हालत से भी परेशान हैं। लगातार पानी में रहने के कारण पशुओं के पैरों में संक्रमण फैल रहा है। चारे की भारी कमी से पशु भूखे हैं। अब तक चार ग्रामीणों को सर्पदंश का सामना करना पड़ा, लेकिन मौके पर मेडिकल सहायता उपलब्ध होने से उनकी जान बच गई। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इसी तरह पानी रहा तो पशुधन का भारी नुकसान होना तय है।
राहत सामग्री पर उठे सवाल
गांव वालों का आरोप है कि जो लोग राहत सामग्री के सबसे अधिक हकदार थे वे वंचित रह गए। कई जरूरतमंद परिवारों तक राशन और अन्य सामग्री नहीं पहुंच पाई। आसपास के गांवों के कुछ लोग और ऐसे परिवार जिन्हें तत्काल राहत की आवश्यकता नहीं थी, वे सामान लेकर चले गए। इससे गांव में असंतोष का माहौल बना हुआ है।
चोरी की घटनाओं ने बढ़ाई परेशानी
आपदा की इस घड़ी में गांव में आपराधिक तत्व भी सक्रिय हो गए हैं। अब तक तीन-चार घरों में चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। लोग कहते हैं कि जब वे सुरक्षित ठिकानों पर थे तभी कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके घरों में सेंधमारी कर नुकसान पहुंचाया। यह स्थिति ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा रही है।
फसल पूरी तरह तबाह
साहूवाल गांव का मुख्य रोजगार खेती-बाड़ी है। इस बाढ़ ने किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। किसान कहते हैं कि यह नुकसान केवल मौसमी नहीं बल्कि आने वाले महीनों की रोजी-रोटी पर भी भारी पड़ेगा। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार उचित मुआवजा दे ताकि वे फिर से खेती शुरू कर सकें।
प्रशासन, सेना और एनजीओ जुटे मदद में
फिलहाल प्रशासन, बीएसएफ, सेना, एनडीआरएफ और कई एनजीओ लगातार राहत व बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है और मेडिकल टीमें गांव का लगातार दौरा कर रही हैं। फिर भी कई ग्रामीणों का कहना है कि यह मदद पर्याप्त नहीं है और उन्हें लंबे समय तक पुनर्वास और पुनर्निर्माण में सहयोग की आवश्यकता होगी।
सरकार से बड़ी उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि साहूवाल पहले भी सीमांत इलाका होने के कारण कठिनाइयों का सामना करता आया है। घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, पशु बीमार हैं और फसल पूरी तरह तबाह है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि गांव के पुनर्निर्माण में विशेष सहयोग दे। ग्रामीणों की मांग है कि मुआवजे के साथ-साथ टूटे-फूटे मकानों की मरम्मत, बीमार पशुओं के इलाज और राहत सामग्री के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
गांव की तस्वीर
साहूवाल गांव की कुल आबादी 356 है। इसमें 184 पुरुष व 172 महिलाएं हैं। गांव में कुल 60 परिवार हैं। बाढ़ ने न केवल उनके घर और खेत तबाह किए बल्कि उनके भविष्य को भी अनिश्चित बना दिया है।