मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पेयजल पीने से बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया है, जहां भगीरथपुरा इलाके में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई है और 100 से ज्यादा लोग बीमार होकर अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। यह घटनाक्रम 25 दिसंबर से 30 दिसंबर के बीच सामने आया, जब स्थानीय निवासियों ने नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी के स्वाद और गंध में असामान्य बदलाव की शिकायत की।
लोगों का कहना है कि नर्मदा नदी का पानी जो नलों के जरिए घरों तक पहुंचाया गया, वह कड़वा था और उसे पीने के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ने लगे। प्रभावित लोगों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गंभीर डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण सामने आए, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों को तत्काल निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा।
इस घटना में 80 वर्षीय नंदलाल पाल की इलाज के दौरान एक निजी अस्पताल में मौत हो गई, जबकि 50 वर्षीय सीमा प्रजापत की अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही जान चली गई। वहीं, 70 वर्षीय उर्मिला यादव ने 28 दिसंबर को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इन मौतों के बाद प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जोनल इंचार्ज शालिग्राम सिटोले और सहायक अभियंता योगेश जोशी को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के इंचार्ज सुभनैत्री शुभम श्रीवास्तव को भी उनके पद से हटा दिया गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी प्रभावित मरीजों का इलाज राज्य सरकार के खर्च पर किया जाएगा। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान भगीरथपुरा इलाके में मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन में रिसाव पाया गया है। यह रिसाव उस स्थान पर था, जहां पाइपलाइन के ऊपर एक शौचालय का निर्माण किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि इसी वजह से गंदगी या किसी अन्य हानिकारक तत्व का पानी में मिश्रण हुआ।
नगर आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने बताया कि रिसाव की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस मामले में लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि भगीरथपुरा क्षेत्र में नई जल आपूर्ति पाइपलाइन बिछाने के लिए कई महीने पहले टेंडर जारी किया गया था, लेकिन काम में देरी क्यों हुई, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर सर्वे किया।
विभाग की टीमों ने 2,703 घरों का दौरा किया और करीब 12,000 लोगों की स्वास्थ्य जांच की। इनमें से 1,146 लोगों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि 111 मरीजों की हालत गंभीर पाए जाने पर उन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें से अब तक 18 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि इलाके से पेयजल के नमूने एकत्र कर प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पानी में किस तरह का प्रदूषण या रासायनिक तत्व मौजूद था। इस बीच, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे मामले को गंभीर आपराधिक लापरवाही करार देते हुए महापौर और नगर आयुक्त के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि अगर नालियों का पानी पीने के पानी में मिल जाए तो आमतौर पर उल्टी, दस्त या पीलिया जैसी बीमारियां होती हैं, लेकिन मौतें नहीं होतीं।
उनका दावा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि किसी जहरीले पदार्थ का पानी में मिश्रण हुआ है, जिसकी गहन जांच जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि इंदौर नगर निगम, राज्य सरकार और केंद्र—तीनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद शहर की यह हालत चिंता का विषय है। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन प्रभावित इलाके में लोगों में डर और गुस्सा दोनों साफ नजर आ रहे हैं, और सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।